अप्रैल में इस फसल की भरपूर डिमांड, भाव उंचा मिले तो किसानों के वारे-न्यारे; जानें लागत और प्रॉफिट का गणित

फरीदाबाद | हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर ऑर्गेनिक और बागवानी खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इसी कड़ी में फरीदाबाद जिले के गांव सुनपेड़ में अगेती तोरी की बुआई शुरू हो गई है. भरतपाल नाम के एक किसान ने बताया कि मंडी में तोरी की अच्छी डिमांड को देखते हुए उन्होंने समय से पहले ही तोरी की बुआई शुरू कर दी है.

Torai

तोरी की खेती का तरीका

भरतपाल ने बताया कि तोरी की फसल लगभग 45 दिन में पककर तैयार हो जाती है. बुआई करने से पहले खेत की तीन बार जुताई करनी पड़ती है. इसके बाद अच्छे से मेड़ बनाई जाती है ताकि पानी की सही व्यवस्था हो सकें. सिंचाई करने के बाद हाथ से बीज बोए जाते हैं. बीज बोते समय पौधों के बीच एक निश्चित दूरी (ब्लांत) रखनी जरूरी होती है ताकि फसल अच्छी तरह से बढ़ सके. इस बार उन्होंने ढाई बीघा खेत में 500 ग्राम बीज लगाया है.

कीमत पर निर्भर करेगी आमदनी

उन्होंने बताया कि एक साल के लिए एक किला 50 हजार रूपए ठेके पर लिया हुआ है. इसके बाद खेत में खाद-बीज, कीटनाशक छिड़काव, मज़दूरी का खर्च आदि जुड़ जाते हैं. यदि बाजार में तोरी का ऊंचा मिल जाए तो लागत काटकर ठीक-ठाक बचत हो जाती है. पिछले साल 10-15 रूपए प्रति किलो तक भाव मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था.

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किसान भरतपाल ने बताया कि अगर तोरी का भाव 30 रूपए प्रति किलो तक मिल जाए तो अच्छी आमदनी हो सकती है. भाव उंचा मिलने की उम्मीद में ही उन्होंने इस बार समय से पहले ही तोरी की बुआई की है. उन्होंने बताया कि वे तोरी को बिक्री के लिए बल्लभगढ़ मंडी में लेकर जाते हैं. वहां की मांग और कीमतों के अनुसार ही उनका मुनाफा तय होता है.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.