राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुआ शहीद प्रदीप नैन, हजारों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

जींद | जम्मू- कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए हरियाणा के जींद जिले के नरवाना विधानसभा क्षेत्र के गांव जाजनवाला निवासी प्रदीप नैन का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांव पहुंचा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी गई. आर्मी की टुकड़ी ने शस्त्र झुका कर उन्हें अंतिम सलामी दी. वो अपने परिवार के इकलौते बेटे थे.

Pradip Nenu Jawan

फफक- फफक कर रो पड़े ग्रामीण

तिरंगे में अपने लाडले के शव को देखकर ग्रामीणों की आंखों से आंसुओं की धारा फुट पड़ी. प्रदीप नैन के पार्थिव शरीर को तिरंगे से सजी गाड़ी से गांव लाया गया. इसकी अगुवाई तिरंगा लगी गाड़ियों और बाइकों ने की. शहीद बेटे के शव को देखकर मां, बहन और पत्नी फफक- फफक कर रो पड़ी. शहीद प्रदीप की शवयात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा. भारत माता की जय, शहीद प्रदीप अमर रहे के नारों से पूरा गांव गूंज रहा था.

कई बड़े नेताओं ने किए पुष्प अर्पित

शहीद प्रदीप नैन की शहादत को सलाम करने हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ कमल गुप्ता, राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, नरवाना विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा के अलावा डीसी मोहम्मद इमरान रजा, एसपी सुमित कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी गांव जाजनवाला पहुंचे और पुष्प अर्पित कर शहीद प्रदीप नैन की शहादत को सलाम किया. डॉ. कमल गुप्ता ने कहा कि प्रदीप नैन ने शहादत देने से पहले 5 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था. उनकी शहादत पर पूरे देश को गर्व महसूस हो रहा है.

कुलगाम में थी तैनाती

बचपन से ही सेना में भर्ती होने का ख्वाब देखने वाला प्रदीप नैन साल 2015 में पैरामिलिट्री फोर्स में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था. फिलहाल उनकी पोस्टिंग पैरामिल्ट्री फोर्स में लांस लायक के पद पर कुलगाव जम्मू कश्मीर में थी. गत दिवस उन्हें कुलगाम में आंतकवादियों के छुपने की सूचना मिली थी, जिसके चलते आर्मी ने ज्वायंट आप्रेशन चलाया.

आर्मी की टुकडी ने लांस नायक प्रदीप नैन के नेतृत्व में आंतकवादियों को घेर लिया और मुठभेड़ हो गई, जिसमें दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई. आतंकवादियों की तरफ से की गई फायरिंग में गोलियां लगने से लांस नायक प्रदीप नैन शहीद हो गए.

आगे बढ़कर नेतृत्व करता था प्रदीप

प्रदीप नैन के साथी रहे मोहित शर्मा ने बताया कि नैन 15 से 20 ऑपरेशन में भाग ले चुके थे, जिसमें वह चाइना बार्डर पर भी तैनात रहे थे. वह अक्सर ऑपरेशन के दौरान सबसे आगे जाने की बात करता था. उन्हें कभी भी किसी हमले का डर नहीं लगता था. दिल्ली में 63 कालवरी में प्रदीप नैन को सर्वश्रेष्ठ वारियर के खिताब से नवाजा गया था.

बेटे की शहादत पर गर्व

इस मौके पर शहीद के पिता बलवान सिंह ने कहा कि बेटे की शहादत पर हमें गर्व है. उनके बेटे को कमांडो बनने का बड़ा जुनून था. वह कहता था कमांडो बनकर दिखाउंगा. उसके अंदर किसी चीज का डर नहीं था. कुछ दिन पहले ही बेटे ने कहा था कि 15- 20 दिनों की छुट्टी लेकर आऊंगा, लेकिन अब वह तिरंगे में ही लिपट कर आया है.

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