कहां थे नगर परिषद के अधिकारी, कई एकड़ जमीन पर पूरी बस्ती बस गई, उन्हें पता भी नहीं चला

नारनौल । शहर के साथ लगते गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ी और उसकी तलहटी पर  सैकड़ों एकड़ भूमि के एक भाग पर अवैध कब्जा कर पक्के मकान बनाकर पूरी बस्ती बस गई है. अभी तक नगर परिषद के किसी अधिकारी का इस तरफ ध्यान भी नहीं गया. यह मामला मीडिया के माध्यम से उजागर हुआ, तब जाकर प्रशासन के कान खड़े हुए.  नगर परिषद ने अपनी जमीन की सुध ली. जब वह मौके पर पहुंचे तो उन्होंने जो नजारा देखा वह हैरान कर देने वाला था.

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अवैध कब्जे को लेकर अब खुली है नगर परिषद की आंखें 

नगर परिषद के स्वामित्व वाली करीब 100 एकड़ से अधिक इस जमीन के एक भाग पर पूरी एक बस्ती बस गई है. जिसको देखते हुए अधिकारियों ने मौके पर माइक से घोषणा करवाई कि जिन भी लोगों ने यहां अवैध कब्जा करके मकान बनाए हैं वह तुरंत अपने कब्जे हटा ले, अन्यथा नगर परिषद को इनके खिलाफ कार्यवाही करनी पड़ेगी. इसकी वजह से जो भी जानमाल का नुकसान होगा उसके लिए अवैध कब्जा धारी खुद जिम्मेदार होंगे.

नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार खसरा नंबर 211,204, तथा 214 आदि नंबरों को ही भूमि रघुनाथपुरा की पहाड़ी और इसके आसपास पड़ती है. इन खसरा नंबरों का कुल रकबा 100 एकड़ से भी अधिक बनता है और मालिक नगर परिषद है. इस जमीन पर अवैध कब्जा करके मकान बना लेने की सूचना पर आज मौके पर जाकर मुनादी करवा दी गई. तकरीबन 40 से 50 मकान मौके पर बने हुए है.

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नगर परिषद पर उठ रहे हैं सवाल

सवाल यह खड़ा होता है कि नगर परिषद की कई एकड़ भूमि पर 40 से 50 मकान बन कर पूरी तरह बस्ती बस जाती है, जिस जगह पर अवैध कब्जा हुआ है, वह शहर और नगर परिषद से महज 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर है. जहां आए दिन नगर परिषद के अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों का आना जाना लगा रहता है. उसके बिल्कुल पास ही नगर परिषद की नंदी गौशाला बनी हुई है.

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जहां पर  अधिकारी और कर्मचारी आते जाते रहते हैं. फिर भी इस तरफ किसी का कोई ध्यान क्यों नहीं गया. वही दूसरा बड़ा सवाल है कि एक-दो दिन या महीनों में इतने मकान वहां पर एक साथ नहीं बन सकते, यानी कि यह कारनामा काफी सालों से चल रहा है. फिर आखिर नगर परिषद आंख मूंद कर क्यों बैठा रहा. मामला सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद अब शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है. लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नगर परिषद की सरकारी भूमि पर मकान बन जाना बिना मिलीभगत के संभव ही नहीं है. इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करके खुलासा करना चाहिए.

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