नई दिल्ली | लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का 78 वर्ष की उम्र में 5 अगस्त को नई दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में निधन हो गया. वे मई 2025 से दिल्ली के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी. भाजपा के कद्दावर नेता के तौर पर उनकी पहचान रही है, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी की खुलकर आलोचना भी की थी.
अस्पताल प्रशासन ने की निधन की पुष्टि
डॉ मलिक के निधन से पूरे देश में शोक की लहर फैल गई है. मिली जानकारी के अनुसार उन्हें गंभीर मूत्र मार्ग संक्रमण और किडनी फेल्योर की समस्या के चलते आईसीयू में शिफ्ट किया गया था. आज दोपहर अस्पताल प्रशासन ने उनके निधन की पुष्टि की. अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने 2019 के पुलवामा हमले में सुरक्षा में चूक और किरू हाइड्रोपावर परियोजना में कथित भ्रष्टाचार जैसे मामलों पर बेझिझक अपनी बात रखी थी, जिससे वे विवादों में भी रहे. इसके बाद, वे भाजपा के प्रखर आलोचक बन गए थे.
ऐसा रहा जीवन
सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसवाड़ा गांव में जाट परिवार में हुआ था. उन्होंने मेरठ कॉलेज से विज्ञान स्नातक और एलएलबी की पढ़ाई की. 1968- 69 में वे मेरठ कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए. 1974 से 1977 तक वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रहे. अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक वे जम्मू- कश्मीर के अंतिम राज्यपाल रहे. उनके कार्यकाल में ही आर्टिकल 370 को हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था. इसके बाद, वे बिहार और मेघालय के राज्यपाल भी रहे.
