सरसों तेल व रिफाइंड ऑयल के भाव में एक बार फिर आई तेजी, जानें कब तक घटेंगे रेट

नई दिल्ली  । देश में शादी-विवाह का सीजन जोरों पर है. हालांकि कोरोना महामारी के चलते शादियों में पहले के मुकाबले रौनक थोड़ी कम है लेकिन कई तरह के स्वादिष्ट पकवान न बनें, तब तक भारत में विवाह की शोभा नहीं बढ़ती है. हालांकि इस सीजन की शुरूआत के साथ ही सरसों तेल और रिफाइंड (Mustard Oil and Refined Oil)सहित सभी तरह के Edible Oils के भाव में तेजी दर्ज हो रही है. आईए जानते हैं कि इस तेजी के पीछे कारण क्या है और अगले कितने दिनों में भाव में गिरावट आ सकती है.

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8-10 रुपए प्रति लीटर महंगे हुए तेल

मोदी नैचुरल के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अक्षय मोदी के अनुसार पिछले दो सप्ताह के दौरान सभी तरह के Edible Oils के दामों में इजाफा हुआ है. उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल लेवल पर Palm Oil और Soyabean Oil में 18-20 रुपए प्रति लीटर का इजाफा हुआ है. जिसके चलते सरसों तेल सहित अन्य सभी तेल के दामों में औसतन 8-10 रुपए का इजाफा हुआ है.

जानिए इस तेजी की वजह

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के प्रेसिडेंट अतुल चतुर्वेदी ने बताया कि भाव में मौजूदा तेजी की वजह इंटरनेशनल लेवल पर कीमतों में आई उछाल है. उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया की सरकार घरेलू स्तर पर पाम ऑयल के Consumption पर जोर दे रही है. मीडिया के हवाले से मिली जानकारी अनुसार इंडोनेशिया सरकार ने पाम ऑयल के एक्सपोर्ट की अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी है. इससे रेट में अंतर दिखाई दे रहा है. चतुर्वेदी के मुताबिक इस समय ब्राजील और अर्जेंटीना में भी खाद्य तेलों के प्रोडक्शन पर असर पड़ा है.

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अक्षय मोदी ने भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे घरेलू कारण होने से इंकार किया. उन्होंने बताया कि मलेशिया में लेबर शॉर्टेज की वजह से भी तेल कीमतों पर असर पड़ा है. मोदी ने कहा कि रूस और यूक्रेन से जुड़े डेवलपमेंट का असर भी Edible Oil की कीमतों पर पड़ा है.

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कब तक कीमतों में आएगी नरमी

सरसों तेल और रिफाइंड तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आमजन की रसोई का बजट बिगड़ा है. ऐसे में कीमतों में तेजी का असर आम आदमी पर साफ नजर आ रहा है. अक्षय मोदी ने बताया कि अगले कुछ दिनों में सरसों तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है क्योंकि घरेलू स्तर पर सरसों का 30-40% अधिक उत्पादन हुआ है.

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