लोकसभा में पास हुआ नया इनकम टैक्‍स बिल, जानें इसके बाद क्या- क्या दिखेंगे बदलाव

नई दिल्ली | लोकसभा के मानसून सत्र में नया इनकम टैक्‍स ब‍िल भारी शोर- शराबे के बीच पास हो गया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस ब‍िल का र‍िवाइज्‍ड वर्जन पेश क‍िया. नए ब‍िल में बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली कमेटी की अध‍िकतर स‍िफार‍िशों को शाम‍िल क‍िया गया है. सोमवार को पेश क‍िये गए ब‍िल को सरकार ने पिछले हफ्ते ‘इनकम- टैक्स बिल 2025’ वापस लेने का फैसला किया था.

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वित्त मंत्री ने बताया क‍ि पुराने बिल को क‍िसी भी कन्‍फ्यूजन से बचने के लिए वापस लिया गया था. अब यह नया ब‍िल 1961 के कानून की जगह लेने का बेस बनेगा. स‍िलेक्‍ट कमेटी की तरफ से कुछ सिफारिशें की गईं थीं, ज‍िसमें कुछ गलत‍ियां भी बताईं गई थीं. उन्हें ठीक करके चीजों को और ज्‍यादा साफ करने के लिए कुछ बदलाव बताए गए थे. आइए जानते हैं नए इनकम टैक्‍स ब‍िल के आधार पर क्‍या- क्‍या बदलेगा.

दिखेंगे कई बदलाव

  • नए इनकम टैक्‍स ब‍िल के तहत भाषा को पहले से ज्‍यादा आसान और स्पष्ट बनाया जाएगा.
  • इसके तहत, Previous Year और Assessment Year जैसे ऑप्शन खत्‍म करके टैक्स ईयर कॉन्सेप्ट को लाया जाएगा.
  • नए ब‍िल में सीबीडीटी (CBDT) को पहले से ज्‍यादा शक्‍त‍ि दी गई है. इससे डिजिटलाइजेशन को ज्यादा बढ़ावा द‍िया जा सकेगा.
  • नए ब‍िल को 536 सेक्‍शन और 16 शेड्यूल में स‍िस्‍टेमेट‍िक क‍िया जाएगा. इससे बदलावों को समझना और पढ़ना ज्यादा आसान हो जाएगा.
  • जीरो टीडीएस सर्ट‍िफ‍िकेट जारी करने की सुविधा मिलेगी.
  • यद‍ि मकान खाली है, तो डीम्ड रेंट टैक्स से राहत मिलेगी.

सम‍ित‍ि की तरफ से बि‍ल में सुझाए गए बदलाव

  • कमेटी ने कहा क‍ि टैक्सपेयर्स को रिफंड में राहत म‍िलनी चाह‍िए. आईटीआर फाइलिंग देरी से होने पर भी टैक्‍सपेयर को रिफंड क्लेम करने की परम‍िशन म‍िलनी चाह‍िए.
  • डिविडेंड में कटौती को लेकर सेक्शन- 80M की फिर से शुरुआत होनी चाहिए.
  • फरवरी में पेश किये गए मसौदे को भारत के डायरेक्ट टैक्स कानून में 60 साल से भी ज्‍यादा समय बाद का सबसे बड़ा बदलाव बताया गया था. इसकी खास बातें न‍िम्‍नल‍िख‍ित थी.
  • भाषा को आसान बनाया गया था, कटौतियों को एक जगह इकट्ठा किया गया था और नियमों को छोटा किया गया था ताकि लोग आसानी से उनका पालन कर सकें. सिस्टम को टैक्स देने वालों के लिए और ज्‍यादा आसान बनाने के लिए कुछ गलत‍ियों के लिए पेनल्टी को कम किया गया था.
  • टैक्स स्लैब, कैपिटल गेन टैक्‍स के नियमों या इनकम कैटेगरी में क‍िसी तरह का कोई बदलाव नहीं क‍िया गया.
  • ‘पहले भरोसा करें, बाद में जांच करें’ के तरीके से मुकदमेबाजी को कम करना मकसद था. इसके तहत एक आधुनिक व्यवस्था थी, ज‍िसमें सीबीडीटी (CBDT) को ज्‍यादा अधिकार दिए गए थे. डिजिटल निगरानी की सुविधा थी और ‘टैक्स ईयर’ का नया कॉन्‍सेप्‍ट शुरू क‍िया गया था.
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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.