सड़कों पर गढ्ढे भरने की नई तकनीक लांच, मानसून में भी नही रूकेगा काम; ढाई साल की वारंटी देगी कंपनी

नई दिल्ली | सड़कों पर गढ्ढे भरने की नई तकनीक एक क्रांति के रूप में उभर कर सामने आई है. इस नई तकनीक की बदौलत अब बरसाती सीजन के दौरान भी सड़कों (Road) पर गढ्ढों को भरने में आसानी हो जायेगी. खास बात यह है कि अगर गड्ढा गीला है और उसमें पानी भी है, तो भी उसे भरने में कोई अड़चन नहीं आएगी. इस तकनीक की विशेषता यह है कि एक बार भरने के बाद ढाई साल तक दोबारा से गढ्ढा नहीं बनेगा.

Road Sadak

ईकोफिक्स तकनीक लाएगी क्रांति

सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) द्वारा विकसित की गई इस तकनीक को ईकोफिक्स नाम दिया गया है. शनिवार को दिल्ली सचिवालय रोड पर इस तकनीक का परीक्षण किया गया, जिसे देखने दिल्ली की बीजेपी सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा भी पहुंचे थे. उन्होंने इस तकनीक की सराहना करते हुए परीक्षण को सफल बताया.

ईकोफिक्स एक रेडी- टू- यूज पाटहोल रिपेयर मिक्स है, जिसे CRRI ने मान्यता प्राप्त स्टार्टअप रामुका ग्लोबल सर्विसेज के साथ मिलकर विकसित किया गया है. दोनों संस्थानों की संयुक्त टीम द्वारा किए गए लाइव प्रदर्शन में जलभराव वाले और सूखे दोनों प्रकार के गड्ढों को बिना किसी जल निकासी के सफलतापूर्वक भरा गया.

तकनीक की खासियत

आविष्कारक और CRRI के वरिष्ठ प्रमुख वैज्ञानिक सतीश पांडेय ने बताया कि यह मिक्स स्टील उद्योग के मेटलर्जिकल वेस्ट यानी स्टील स्लैग से तैयार किया गया है. यह बेहद टिकाऊ और किफायती हैं, जो प्राकृतिक संसाधनों पर से निर्भरता को खत्म करेगा.

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उन्होंने बताया कि रेडी- टू- यूज़ पाटहोल रिपेयर मिक्स को तैयार करने के बाद 8 महीने तक बैग में पैक कर रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सकता है. इसमें गिट्टी का उपयोग नहीं होगा. इसकी जगह स्टील फैक्ट्रियों का कचरा और मोडीफाई कोलतार का उपयोग होता है. इस तकनीक से रिपेयर की गई सड़क को मात्र 15 मिनट बाद ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाता है.

कंपनी देगी ढाई साल की वारंटी

PWD मिनिस्टर प्रवेश वर्मा ने बताया कि इस तकनीक को लागू करने वाली कंपनी ने ढाई साल की वारंटी देने का वादा किया है. यदि अगले ढाई साल में किसी तरह की मरम्मत की आवश्यकता होगी, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होगी. उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार और पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा इस तकनीक का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.