पानीपत | हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर ऑर्गेनिक और बागवानी खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इसी कड़ी में पानीपत के गांव गढ़ी निवासी किसान विनोद कुमार ने सब्जियों की खेती से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि 50 से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार का सहारा बने हुए हैं.
दिल्ली मंडी तक सप्लाई
12वीं कक्षा तक पढ़े किसान विनोद कुमार ने बताया कि पहले गेहूं और धान की परम्परागत खेती करते थे लेकिन उससे आमदनी नाममात्र ही रहती थी. इसके बाद, उन्होंने सब्जियों की खेती करना शुरू कर दिया. आज वह ड्रिप सिस्टम, पोली हाउस, स्प्रिंग कलर, लो टनल और नेट हाउस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए 18 एकड़ जमीन पर आधुनिक तकनीक से खेती कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि वह अपने खेत में घीया, टमाटर, मिर्च, टिंडा, खरबूजा, फूलगोभी, ब्रोकली सहित करीब एक दर्जन से ज्यादा किस्मों की सब्जियां उगाते हैं. वे अपने खेत में पूरी तरह से ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं. उनकी सब्जियां दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी के अलावा मदर डेयरी, रिलायंस फ्रेश और अन्य प्राइवेट एजेंसियों पर सप्लाई की जाती है. यहां उन्हें उचित बाजार भाव मिलता है, जिससे लाखों रूपए की आमदनी हो जाती है.
जल संरक्षण की मिसाल
विनोद कुमार ने बताया कि जल संरक्षण पर उनका विशेष ध्यान हैं और वह खेत में कभी भी सीधी सिंचाई नहीं करते हैं. वे ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली से सिंचाई करते हैं, जिससे 80% तक पानी की बचत होती है. ड्रिप विधि से पानी सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जबकि स्प्रिंकलर विधि से बारिश की तरह पानी का छिड़काव होता है. उनकी इस कामयाबी के पीछे बागवानी विभाग का विशेष योगदान रहा है. विभागीय अनुदान और तकनीकी सहयोग से उन्हें आधुनिक खेती अपनाने में मदद मिली है.
खुद तैयार करते हैं पौध
विनोद ने बताया कि वह अपनी नर्सरी में सब्जियों की पौधे खुद तैयार करते हैं. बाहर की नर्सरी से खरीदने पर प्रति पौध डेढ़ रुपए खर्च आता है, जबकि खुद की नर्सरी में वही पौध 20 से 30 पैसे में तैयार हो जाती है. इस तरह भी वह हर साल लाखों रूपए की बचत कर लेते हैं.
