भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव इंद्रजीत पर टिकी हुई है धुरंधरों की निगाहें, जानिये वजह

रेवाड़ी। अगर हरियाणा के ऐलनाबाद  विधानसभा उपचुनाव को छोड़ दे तो प्रदेश में न तो विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं ना ही देश में लोकसभा के. परंतु पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अंदाज में राव इंद्रजीत की भाषण शैली, वही जींद में इनेलो का शक्ति प्रदर्शन और उसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह की मौजूदगी ने पूरी तरह क्षेत्र में चुनावी माहौल बना दिया है. इस सूची में कुछ और नाम भी जुड़ सकते हैं.

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Bhupender Singh Hooda

आखिर क्यों टिकी है धुरंधरों की निगाहें भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव इंद्रजीत पर 

परंतु धुरंधरों की निगाहें मुख्य रूप से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव इंद्रजीत सिंह के रुख पर टिकी हुई है. बता दे कि पार्टी की रणनीति के बीच आने वाले समय में इन दोनों दिग्गजों के कदम भी हरियाणा की राजनीति की दिशा करेंगे. बता दे कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव इंद्रजीत सिंह  द्विअर्थी संवाद के सहारे अपनों को ललकार रहे हैं. वह खुलकर बता रहे हैं कि उनके पास जनाधार है, वही पार्टी ने उन लोगों को आगे किया है जिनका जनाधार नहीं है. वही दोनों के विरोधी यह बताना भी नहीं भूलते कि उनकी ताकत उन पार्टियों से बनी हुई है जिन्हें संगठन के सिपाहियों ने खून पसीने से खड़ा किया है. ऐसे में यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में यह दोनों धुरंधर हरियाणा की राजनीति की दिशा तय करेंगे.

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23 सितंबर को जंग ए आजादी के नायक राव तुलाराम की पुण्यतिथि पर झज्जर जिले के गांव पाटोदा में रैली हुई, जिसमें राव इंद्रजीत सिंह ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ की  मौजूदगी में ऊपर नीचे की बहस छेड़ी. राव इंद्रजीत सिंह ने खुद को जमीनी स्तर का नेता बताते हुए कहा कि कुछ लोग ऊपर से थोपे जाते हैं. वही इंद्रजीत के कटाक्ष मुख्यमंत्री मनोहर लाल व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के लिए माने जा रहे हैं. इनकी शिकायत दिल्ली तक पहुंची है.

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