रेवाड़ी: 7 साल पहले पति हुआ लकवाग्रस्त, तीन बच्चों को पढ़ाया लिखाया; अब बेटी ने जीते कई गोल्ड मेडल

रेवाड़ी | हरियाणा के जिला रेवाड़ी के ग्राम गादला निवासी सुनीता की कहानी आप लोगों को अंदर से झकझोर देगी. साल 2016 में जब पति राजबीर के शरीर के आधे हिस्से में अचानक लकवा मार गया तो एक पल के लिए सुनीता को सब कुछ खत्म होता नजर आया. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होने के कारण एक ही बार में विपदाओं का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन सुनीता ने हिम्मत नहीं हारी. पति की बीमारी का खर्च उठाने के साथ- साथ तीन बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी उन पर आ गया.

Sunita

संकट की घड़ी में नहीं छोड़ा हौसला

सुनीता ने संकट की इस घड़ी में अपने हौसले को बुलंद रखा और परिवार की जिम्मेदारियों को मजबूती से संभाला. सुनीता ने बताया कि तीनों बच्चों को पढ़ाने और बीमार पति की देखभाल के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उस दौरान बड़ी बेटी अनुराधा 9वीं कक्षा में पढ़ती थी और वह हैंडबॉल भी खेलती थी. ऐसे में पढ़ाई और खेल न छूटना एक बड़ी समस्या थी लेकिन बेटी के खेल को हमेशा प्रोत्साहित किया है.

अनुराधा ने जीते कई मेडल

धीरे- धीरे अनुराधा भी उनके काम में हाथ बँटाने लगीं लेकिन पढ़ाई और खेलकूद भी चलता रहा. सुनीता ने कहा कि उनकी बेटी ने स्कूल नेशनल में तीन पदक जीते और खेल के पहले चार वर्षों में एक बार स्कूल नेशनल में भाग लिया और अब वह उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित सीनियर नेशनल हैंडबॉल चैंपियनशिप में हरियाणा की ओर से कांस्य पदक जीता है. इससे पहले, साल 2022 में भी अनुराधा सीनियर नेशनल में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं.

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दिन- रात करती हैं मेहनत

अब अनुराधा बीपीएड करने की तैयारी कर रही सुनीता ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी अनुराधा ने खेल के साथ पढ़ाई भी जारी रखी है. अब वह बीए अंतिम वर्ष में पढ़ रही है और आगे बीपीएड की तैयारी है. अनुराधा का सपना राष्ट्रीय टीम के लिए खेलते हुए पदक जीतना है. सुनीता ने बताया कि उनकी छोटी बेटी बीकॉम प्रथम वर्ष और बेटा 12वीं में पढ़ रहा है. वह पूरी कोशिश करती हैं कि बच्चों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. इसके लिए वह दिन रात मेहनत करती हैं।

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Pravesh Chauhan
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मेरा नाम प्रवेश चौहान है. मीडिया लाइन में पिछले 4 वर्ष से काम कर रहा हूँ. मैंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.