पानीपत। हरियाणा में मिलावटी शराब का सेवन करने से हुई लोगों की मौत के मामले में विशेष जांच दल एसआईटी का गठन किया गया था. इस जांच दल को शराब फैक्ट्री से संबंधित कई बड़े सवालों के जवाब और रिकॉर्ड देने से आबकारी विभाग ने साफ मना कर दिया है. आबकारी एवं कराधान विभाग के प्रधान सचिव अनुराग रस्तोगी ने हरियाणा के गृह सचिव राजीव अरोड़ा को एक पत्र लिखकर यह प्रश्न किया है कि सीएम से इजाजत लेने के बाद विशेष जांच दल एसआईटी बनाया गया था क्या और इसे किस एक्ट के तहत बनाया गया. वास्तव में शराब माफिया के नेटवर्क तक पहुंचने के लिए एसआईटी शराब फैक्ट्री से संबंधित डॉक्यूमेंट मांग रही है.
आरंभ हुई कागजी लड़ाई
लेकिन अनुराग रस्तोगी ने लोगों की मृत्यु किन वजहों से हुई, इनकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार हैं, इसकी जांच करने की नसीहत एसआईटी को दी. शराब फैक्ट्री के मामले में हस्तक्षेप न करने की बात कही गई है. प्रधान सचिव के अनुसार जो जो जानकारियां एसआईटी के लिए आवश्यक थी, वह उन्हें उपलब्ध करा दी गई है. बाकी पूछे गए प्रश्नों के उत्तर सीएम की अनुमति के बिना नहीं दिए जाएंगे. अब मिलावटी शराब मामले की जांच में कागजी लड़ाई शुरू हो चुकी है.
गृह मंत्री ने किया था एसआईटी का गठन
आपको बता दें कि फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत जिले में शराब का सेवन करने के कारण कई लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने एसआईटी का गठन श्रीकांत जाधव के नेतृत्व में किया था. इस कमेटी में नरेंद्र बजानिया, गंगाराम पूनिया, आईपीएस राजेश दुग्गल, अंबाला रेंज के आईजी वाई पूर्ण कुमार को शामिल किया गया था.
हरियाणा में फैले अवैध शराब माफिया के नेटवर्क एसआईटी की पैनी नजर
सूत्रों के अनुसार फिलहाल SIT हरियाणा में फैले अवैध शराब माफिया के नेटवर्क पर भी अपनी नजर बनाए हुए हैं और मामले की गंभीरता से जांच कर रही है. शराब फैक्ट्रियों में स्टॉक की अमाउंट, वहां पर आबकारी विभाग ने कब निरीक्षण किया और यदि कहीं पर कमी पाई गई तो क्या उस पर कार्यवाही की गई. लेकिन अब आबकारी विभाग के अधिकारी इन प्रश्नों का उत्तर देने से अपना बचाव कर रहे हैं. अब जब भी आबकारी विभाग से एसआईटी यह रिकॉर्ड मांगती है तो एसआईटी को साफ जवाब दे दिया जाता है कि हरियाणा सरकार की इजाजत लेने के बाद ही उन्हें यह जानकारियां उपलब्ध करवाई जाएंगी.
