यमुनानगर | हरियाणा के जिला यमुनानगर के 5 बच्चों ने गजब कारनामा कर दिखाया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन बच्चों ने वो कर दिखाया है जो हर किसी के बस की बात नहीं है. इन बच्चों ने न केवल दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क उमलिंग- ला दर्रा तक पहुंचने का साहस दिखाया बल्कि वहां देश का झंडा फहराकर योग और मलखंब का प्रदर्शन भी किया. बच्चों का नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड पर दर्ज किया गया है.
कठिनाइयों का सामना कर पहुंचे उमलिंग- ला दर्रा
दसवीं कक्षा की छात्रा हरमन राव ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें अच्छी और बुरी दोनों स्थितियों का सामना करना पड़ा. कहीं- न- कहीं सड़क सही नहीं थी और उनकी कार पर भी काफी दबाव था जिसके कारण वह हर पल किसी अनहोनी की आशंका के साथ आगे बढ़ रहे थे. रहने, खाने- पीने का निर्णय मौके पर ही लेना पड़ता था. घर से निकलने से पहले हमने जो योजना बनाई थी वह पूरी नहीं हो पाई लेकिन इससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हुई है. परिवार ने इतना सपोर्ट किया कि कभी लगा ही नहीं कि मैं लड़की हूं, ये नहीं कर पाऊंगी.
सेना के जवानों ने दिया पूरा सहयोग
ये पांचों बच्चे कोच सुभाष शर्मा के साथ उमलिंग- ला घूमने निकले थे. 6 महीने पहले से ही बच्चों ने अलग- अलग तापमान में रहने और उसे सहन करने का अभ्यास शुरू कर दिया था. सुविधा के नाम पर उनके पास एक प्राथमिक चिकित्सा किट और कुछ ऑक्सीजन सिलेंडर थे लेकिन हर जगह सेना के जवान मौजूद थे, जो यह कहकर हौसला बढ़ा रहे थे कि किसी भी चीज की जरूरत हो तो बेझिझक बताएं.
उमलिंग- ला दर्रा है सबसे उंची सड़क
आपकी जानकारी के लिए बता दिया जाए कि उमलिंग- ला दर्रा दुनिया की सबसे ऊंची सड़क है जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है. यह सड़क जम्मू- कश्मीर के पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास लेह से 230 किमी दूर कोयुल लुंगपा और सिंधु नदी के बीच की सीमा पर है. यह दर्रा समुद्र तल से 19 हजार 300 फीट की ऊंचाई पर है. वहीं, सर्दी के मौसम में माइनस 40 डिग्री तक पारा गिरता है.
बीमारियों का भी होता है खतरा
गौरतलब है कि अधिक ऊंचाई और वनस्पति की कमी के कारण यहां मैदानी इलाकों की तुलना में 50 प्रतिशत कम ऑक्सीजन है जिसके कारण उच्च ऊंचाई वाली पर्वतीय बीमारी जिसे एएमएस कहा जाता है. फुफ्फुसीय एडिमा और सेरेब्रल एडिमा आदि का खतरा होता है. इन बीमारियों से मृत्यु भी हो सकती है. यहां सड़क का निर्माण बीआरओ द्वारा किया गया है, जिसे पृथ्वी पर सबसे ऊंची मोटर योग्य पक्की सड़क होने का खिताब प्राप्त है.
