प्रयागराज हादसे में देवदूत बने गोहाना के 5 युवक, जान हथेली पर रखकर बचाई कई जिंदगियां; आंखों देखा हाल किया बयां

सोनीपत | उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान बुधवार रात भगदड़ मच गई, जिसमें कई श्रद्धालुओं की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए. इसी भगदड़ में हरियाणा के गोहाना के पांच युवकों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए कई लोगों की जान बचाई. युवकों ने बताया कि वे त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए जा रहे थे. वह गंगेश्वर बजरंगदास चौराहा, अमिताभ पुलिया के पास पहुंचे, जहां भारी भीड़ थी.

Mahakumbh Stampede Jind compressed

श्रद्धालु एक ही जगह पर फंसे हुए थे, न वे आगे बढ़ पा रहे थे और न ही पीछे हट पा रहे थे. इसी दौरान कुछ लोगों ने बैरिकेड्स के बीच से निकलने की कोशिश की, लेकिन नीचे लगे बैरिकेड्स नजर नहीं आने के कारण वे उसमें उलझकर गिरने लगे.

कई लोगों की बचाई जान

पीछे से तेज भीड़ आने के कारण भगदड़ मच गई, जिससे कई श्रद्धालु जमीन पर गिरकर कुचले जाने लगे. गोहाना के युवकों ने तुरंत बैरिकेड्स के पाइप हटाए और रास्ता साफ कर कई लोगों की जान बचाई. गोहाना के गांव खानपुर खुर्द के मनजीत ढिल्लो, आहुलाना गांव के जयदीप मलिक, महमूदपुर गांव के आदिल मान, पुरानी अनाज मंडी के भजनलाल और दिल्ली पुलिस विजिलेंस में एएसआई प्रवीण उर्फ पिंटू महाकुंभ स्नान के लिए पहुंचे थे.

मंगलवार रात को वे संगम तट से करीब 3 किलोमीटर दूर ठहरे हुए थे. बुधवार सुबह करीब 3:30 बजे जब वे स्नान के लिए निकले, तो करीब एक घंटे में 2.5 किलोमीटर पैदल चलकर संगम तट से 500- 600 मीटर दूर पहुंचे.

श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़

वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी, जिससे आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा था. बैरिकेड्स के कारण कई लोग नीचे गिरने लगे और ऊपर से भीड़ गुजरने लगी. तभी इन युवकों ने चीख- पुकार सुनकर तेजी से मदद के लिए कदम बढ़ाया और बैरिकेड्स हटाकर रास्ता बनाया. जब भगदड़ शांत हुई, तो उन्होंने देखा कि 3 श्रद्धालु उनकी आंखों के सामने दम तोड़ चुके थे और 7 से 8 लोग बेहोश पड़े थे. उन्होंने घायलों को तुरंत दूसरी तरफ ले जाकर बचाने का प्रयास किया और कई बेहोश श्रद्धालुओं को होश में लाने में भी मदद की.

बर्बादी के मंजर ने झकझोर दिया दिल

जब हालात सामान्य हुए और 6- 7 घंटे बाद ये युवक दोबारा संगम तट पर स्नान करने पहुंचे, तो वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला था. भगदड़ की वजह से श्रद्धालुओं के कपड़े और अन्य सामान तट पर बिखरे हुए थे. लोग एक- दूसरे को संभालने में जुटे हुए थे और कई अब भी सहमे हुए थे. स्नान के बाद युवक गोहाना के लिए निकल गए.

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Nisha Tanwar
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