होली पर बनाए जाने वाले गोबर के गुलरिया का महत्व, इस परंपरा का राज जान आप भी रह जाएंगे हैरान

अंबाला | हमारा देश हिंदुस्तान विविधताओं से भरा हुआ देश है. यहां समय- समय पर हर प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं और उनको मनाने का तरीका भी अलग- अलग होता है. हर एक त्यौहार अपने अंदर खुशियां समेटे आता है और लोगों के चेहरे पर मुस्कान छोड़ जाता है. कुछ ही समय बाद देश भर में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा. इससे एक दिन पहले होलिका माता की पूजा होगी, जिसे देशभर में अलग- अलग तरीकों से मनाया जाएगा. हरियाणा की बात करें, तो यहां गांव से लेकर शहरों तक होलिका माता की पूजा एक खास तरीके से की जाती है.

Gobar Ki Gulariya

पूर्वजों के समय से चली आ रही प्रथा

यहां गाय के गोबर से गुलरिया बनाए जाते हैं, जिसे होलिका दहन के समय होलिका माता को चढ़ाया जाता है. सदियों पुरानी परंपरा को लोग वर्षों से निभाते चले आ रहे हैं. इस बारे में जानकारी देते हुए अंबाला छावनी निवासी लता देवी ने बताया कि उनके पूर्वजों के समय से यह परंपरा चली आ रही है. होली के त्योहार से कुछ समय पहले ही वह शुद्ध गाय का गोबर लेकर गुलरिया (बड़कुल्ले) बना लेते हैं, ताकि यह अच्छे से सूख जाए. जब होलिका दहन का दिन आता है, तब इनका हार बनाकर होलिका माता को चढ़ाया जाता है.

माना जाता है आस्था का प्रतीक

बिंद्रा देवी ने बताया कि वह भी गाय के गोबर से गुलरिया बना रही हैं. इसके लिए उन्होंने अलग- अलग डिजाइन तैयार किए हैं. ये जब सूख जाएंगे, तो इन्हें कलावे में पिरोकर हार बना कर होलिका माता को पूजा के दौरान चढ़ाया जाएगा. सदियों से यह परंपरा चली आ रही है. इस दिन होलिका माता की परिक्रमा की जाती है. उसके बाद, घर से रंग, गुजिया और अन्य वस्तुऐं लेकर सभी चीजें पूजा के दौरान चढ़ाई जाती हैं. ऐसा माना जाता है कि इन परंपराओं से लोगों को सुख- समृद्धि मिलती है. इसके अलावा, इसे आस्था का प्रतीक भी माना जाता है.

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Nisha Tanwar
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