महाशिवरात्रि पर नूंह में नल्हरेश्वर मंदिर में लगेगा मेला, लाखों भक्तों के पहुंचने की उम्मीद; जानें इतिहास

नूंह | हरियाणा के नूंह जिले में महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2025) पर ऐतिहासिक नल्हरेश्वर महादेव शिव मंदिर पर अबकी बार भक्तों का हुजूम उमड़ेगा. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का इतिहास 5200 साल पुराना है. महाशिवरात्रि के पर्व पर इस मंदिर में भगवान शिव के भक्त आकर भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. यह वही मंदिर है, जहां 31 जुलाई 2023 को हिंसा हुई थी.

Nalahareshvar Mahadev Mandir Nuh

इस मंदिर में महाशिवरात्रि के पर्व पर लाखों लोग भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए पहुंचे हैं. इस भव्य कार्यक्रम को लेकर मंदिर समिति ने तैयारियां शुरू कर दी है.

पांडवों ने यहाँ बिताया था कुछ समय

भगवान शिव का यह मंदिर अरावली पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपने दामन में पुराने इतिहास को संजोए हुए हैं. बताया जाता है कि जब पांडव अज्ञातवास पर थे, तब उन्होंने इस पर्वत पर कुछ समय बिताया था. इस मंदिर के पास एक कदम का पेड़ है, जिससे सदियों से साफ सुथरा और मीठा जल बहता रहता है. इसकी जड़ों के नीचे एक कुंडली बनी हुई है, जिसमें मोटर या नाली से पानी निकालने के अलावा अगर किसी बर्तन से पानी निकाला जाए, तब भी उसकी मात्रा कम नहीं होती.

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श्री कृष्ण ने चुनी थी ये जगह

इतिहासकारों का मानना है कि कौरवों और पांडवों का समझौता करवाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने इसी जगह को चुना था. जहां श्री हरि के चरण पड़े वहां प्राय कदम का पेड़ मिलता है. इस पेड़ के नीचे से पानी निकलता है, उस तक पहुंचने के लिए मंदिर समिति की तरफ से 287 सीढ़ियां बनाई गई हैं. मंदिर समिति के चेयरमैन सरदार जीएस मलिक ने जानकारी देते हुए बताया कि महाशिवरात्रि के पर्व पर यहाँ भव्य मेला लगता है. यहाँ शिवभक्त कावड़ चढ़ाते हैं और भोले नाथ की अराधना करते हैं. हर सोमवार को यहाँ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है. साल 1983 में श्री श्री 1000 ज्ञान गिरी जी महाराज ने मंदिर परिसर को भव्य रूप देना शुरू किया था.

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Nisha Tanwar
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