चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 100 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने के विरुद्ध एक याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है. दरअसल, हरियाणा में सरकारी भर्तियां (Govt Vacancies) हमेशा से अटकती रही है. इन दिनों एक ऐसा ही मामला देखने को मिला है, जिसमें एक उम्मीदवार कों 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर भी नौकरी नहीं मिली. अभ्यर्थी ने इसके खिलाफ अदालत याचिका दायर की.

100 फीसदी अंक लेने पर भी नहीं मिली नौकरी
इस मामले में करनाल निवासी मोनिका ने प्रतियोगी परीक्षा की लिखित परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक लिए थे, मगर उसे राज्य की बिजली वितरण कंपनी में जूनियर सिस्टम इंजीनियर के पद पर नहीं चुना गया. उम्मीदवार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षा में शत- प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद भी उसे नौकरी से वंचित करना समानता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है.
146 पदों पर भर्ती के लिए जारी हुआ था विज्ञापन
याचिका में आरोप लगाया गया कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के लिए जेएसई (JSE) के 146 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन दिया था और इन पदों के लिए योग्यता तय की थी. चयन मानदंड के मुताबिक 90 अंक की परीक्षा होनी थी. सामाजिक आर्थिक मानदंड से संबंधित उम्मीदवारों को 10 अंक दिए जाने थे.
फाइनल लिस्ट में नाम न होने पर हैरान हुई याचिकाकर्ता
27 फरवरी 2021 को वह लिखित परीक्षा के लिए उपस्थित हुई थी. यह परीक्षा आनलाइन आयोजित की गई थी और मोनिका ने लिखित परीक्षा में कुल 90 अंकों में से 90 अंक हासिल किए थे. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए याचिकाकर्ता का नाम शार्टलिस्ट हुआ था. 22 अप्रैल 2021 को जब फाइनल सिलेक्शन लिस्ट घोषित हुई तो याचिकाकर्ता को हैरानी हुई, क्योंकि लिखित परीक्षा में 100% अंक लेने के बावजूद उसका चयन नहीं हो सका.
इस वजह से नहीं हो पाया सिलेक्शन
उसे पता चला कि उसका चयन इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि सामान्य वर्ग के कट- आफ अंक 93 अंक थे और सामान्य वर्ग के लिए वेटिंग लिस्ट 92 अंक निर्धारित की गई थी. राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए सामाजिक आर्थिक मानदंडों के कारण याचिकाकर्ता को चयन सूची में स्थान नहीं मिला. इस श्रेणी के तहत, उन उम्मीदवारों को अतिरिक्त 10 अंक दिए जाते हैं जो विधवा, अनाथ या उम्मीदवार के परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं है.
परिणाम रद्द करने व चयन के आदेश की मांग
इस मामले में याचिकाकर्ता की अपेक्षा लिखित परीक्षा में 84 से 89 तक बहुत कम अंक हासिल करने वालों को सामाजिक आर्थिक मानदंडों के तहत अतिरिक्त अंक मिले और उनका चयन हो गया. याची ने हाई कोर्ट से जेएसई पद के लिए घोषित 22 अप्रैल 2021 के परिणाम को रद करने की मांग की है. याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह न्याय के हित में फैसला करें और एक मेधावी उम्मीदवार होने नाते उसे जेएसई के पद पर चयन के आदेश जारी करे.