ज्योतिष | हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का व्रत को विशेष महत्व प्राप्त है, इसे बासौडा भी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, शीतला अष्टमी का व्रत (Sheetala Ashtami Vrat) चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है, इस दिन माता शीतला की विधि विधान से पूजा अर्चना करने का भी महत्व बताया गया है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, शीतला अष्टमी का व्रत करने में इस दिन माता की पूजा विधि व्रत करने से आपको मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. आज की इस खबर में हम आपको इसी व्रत से जुड़ी हुई जानकारी देने वाले हैं.
कब है शीतला अष्टमी
हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 22 मार्च 2025 को सुबह 4:30 पर शुरू होगी और 23 मार्च 2025 को सुबह 5:23 मिनट पर समाप्त होगी. शीतला अष्टमी 22 मार्च 2025 शनिवार को मनाई जाएगी, शीतला अष्टमी पूजन शुभ मुहूर्त 6:23 मिनट से शुरू होकर 6:30 मिनट तक रहेगा, पूजन की अवधि कुल 12 घंटे 11 मिनट की रहने वाली है.
इस प्रकार करें पूजा- अर्चना
हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी या बासौडा के दिन बासी भोजन खाने की परंपरा बताई जाती है. जैसा की इसके नाम से ही प्रतीत हो रहा है कि माता शीतला को शीतल यानी की ठंडी चीज काफी पसंद होती है. शीतला सप्तमी- अष्टमी दोनों दिन माता को ठंडी चीजों का भोग लगाया जाता है, कहा जाता है कि देवी शीतला चेचक, खसरा आदि रोग को नियंत्रित करती है और इन रोगों के प्रकोप से सुरक्षा हेतु ही मां की पूजा अर्चना भी करते हैं.
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें. व्रत का संकल्प ले, पूजा के लिए थाली सजा ले. एक थाली में बासी भोजन रखें, दूसरी थाली में दीप रोली, चंदन, अक्षत, सिंदूर आदि रखें.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
