नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक संचालन को सुगम बनाने की दिशा में निरंतर नए प्रयास किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में दिल्ली सरकार (Delhi Govt) ने एक नई योजना बनाते हुए रिंग रोड के ऊपर एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव रखा है. लोक निर्माण मंत्री (PWD) प्रवेश वर्मा ने बताया कि खंभों पर बनने वाले इस एलिवेटेड रोड को रैंप के जरिए दूसरी सड़कों से जोड़ा जाएगा. इससे जहां रिंग रोड पर ट्रैफिक जाम कम करने में मदद मिलेगी, तो वहीं दूसरी सड़कों पर भी ट्रैफिक संचालन बेहतर होगा.
केंद्र सरकार की हरी झंडी
पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस प्रोजेक्ट को लेकर केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से चर्चा की थी और उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए हरी झंडी दिखा दी है. उन्होंने कहा कि दिल्ली की बीजेपी सरकार का यह सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा. इसे उनके कार्यकाल में ही पूरा किया जाएगा.
प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली की दो रिंग रोड पर अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है. ऐसे में एलिवेटेड रोड निर्माण से मौजूदा सड़क पर ट्रैफिक दबाव कम होगा और साथ ही, रिंग रोड से जुड़ने वाली दूसरी सड़कों से भी ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिलेगी. उन्होंने बताया कि चूंकि नई सड़क पूरी तरह से एलिवेटेड होगी, इसलिए इसे मौजूदा सड़क के सेंट्रल वर्ज पर खंभों पर बनाया जा सकता है. इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी और इसलिए इसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सकता है.
6 हजार करोड़ रुपए आएगी लागत
रिंग रोड से गुजरने वाला ज्यादातर ट्रैफिक मथुरा रोड, अरबिंदो मार्ग, डीएनडी फ्लाइवे या IGI एयरपोर्ट, गुरुग्राम, रोहतक रोड और दूसरे हाईवे की तरफ जाता है. ऐसे में नया एलिवेटेड रोड बनने से वाहन बिना किसी रूकावट के अपने गंतव्य स्थान की ओर बढ़ सकेंगे. PWD मंत्री ने बताया कि एलिवेटेड रोड निर्माण पर प्रति किलोमीटर लगभग 100 करोड़ रुपए की लागत राशि खर्च होती है. ऐसे में 55 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर लगभग 6 हजार करोड़ रुपए की लागत राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है.
