गुरुग्राम, IAS Monika Rani | हमारे समाज में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो मुसीबतों के सामने हार मान लेते हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी होते हैं जो इन परेशानियों का डटकर सामना करते हैं और सफलता की मिसाल बनते हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक नाम है मोनिका रानी का. मोनिका रानी एक ऐसी आईएएस अधिकारी हैं जो एक टीचर से जिलाधिकारी के पद तक पहुंचीं.
अपने कार्यकाल के दौरान वह हमेशा चर्चा में बनी रहीं. चाहे 27 अधिकारियों का वेतन रोकना हो या ‘ऑपरेशन भेड़िया’ चलाना, उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में कड़े और प्रभावी फैसले लिए.
बचपन से देखा था IAS बनने का सपना
मोनिका रानी का जन्म मार्च 1982 में हरियाणा के गुरुग्राम में हुआ था. बचपन से ही उन्होंने आईएएस बनने का सपना देखा था और उसे अपनी मेहनत व लगन से पूरा भी किया. साल 2005 में उनकी शादी हुई, जिसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं. जल्द ही, वह एक बच्चे की मां भी बन गईं, जिससे जिम्मेदारियां और बढ़ गईं. उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा और उसे पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष करती रहीं.
चौथे प्रयास में मिली सफलता
मोनिका रानी ने बीकॉम और इकोनॉमिक्स में एमए की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही वह दिल्ली के बिजवासन स्थित एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका बन गईं. इसी दौरान उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी. वर्ष 2010 में उन्होंने अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में 70वीं रैंक प्राप्त की और 30 अगस्त 2010 को यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी बन गईं.
27 अधिकारियों का रोका वेतन
कांवड़ यात्रा 2025 की तैयारियों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर उन्होंने सख्त कार्रवाई की. उन्होंने 27 अधिकारियों का वेतन रोकते हुए फटकार लगाई. इसके बाद कुछ अधिकारी उनके खिलाफ धरने पर भी बैठ गए. हाल ही में उनका ट्रांसफर किया गया है और अब उन्हें विशेष सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग तथा अपर महानिदेशक, स्कूल शिक्षा के पद पर तैनात किया गया है.
प्रधानमंत्री पुरस्कार से हुईं सम्मानित
मोनिका रानी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2025 के सिविल सर्विस डे पर प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए चयनित किया गया. 21 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. देशभर के केवल 10 जिलों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया, जिनमें उत्तर प्रदेश का बहराइच जिला भी शामिल रहा. वर्ष 2023 में वह उस समय भी सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने डीएम आवास में 32 वर्षों से कार्यरत कुक इंद्र बहादुर को रिटायरमेंट के मौके पर उनके परिवार सहित सम्मानपूर्वक विदाई दी थी. इनकी इस पहल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी.
