गुरुग्राम | दिल्ली से सटे गुरुग्राम में शहरवासियों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया है. गुरुग्राम मेट्रो डिवलेपमेंट ऑथोरिटी (GMDA) ने चंदू बुढेरा जल शोधन संयंत्र की तर्ज पर अब बसई जल शोधन संयंत्र की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई है. इस संयंत्र की क्षमता 270 MLD है जिसे बढ़ाकर 370 किया जाएगा.
GMDA ने 100 MLD की नई इकाई की स्थापना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगले साल के आखिर तक इस योजना को धरातल पर अमलीजामा पहना दिया जाएगा. जीएमडीए के एक अधिकारी ने बताया कि यहां पंपिंग मशीनरी सेट करने के साथ ही एक भंडारण टैंक भी बनाया जाएगा. इसके अलावा, सिंचाई विभाग से अतिरिक्त नहरी पानी की भी मांग की जाएगी.
पानी के टैंकरों पर निर्भर शहरवासी
गर्मियों के सीजन की बात करें तो पुराने गुरुग्राम के इलाके जिनमें DLF, दूधाहेड़ा, चक्करपुर, नाथूपुर, सिरहौल, सेक्टर- 23, सेक्टर- 22, सेक्टर 56-57, सुशांत लोक फेज- 2 और 3 शामिल हैं, में लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है. ऐसी स्थिति में लोगों को पानी के टैंकर के लिए 1500 से 2 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं. ऐसे में बसई जल शोधन संयंत्र प्लांट में नई इकाई के चालू होने पर पुराने गुरुग्राम के इन इलाकों से पेयजल संकट को दूर करने में मदद मिलेगी. प्लांट की क्षमता बढ़ने से शहर की तेजी से बढ़ती आबादी की पेयजल जरूरतें पूरी होगी.
वर्तमान में स्थिति
- शहर की आबादी 40 लाख है.
- चंदू बुढेरा जल उपचार संयंत्र की क्षमता 400 MLD है.
- बसई जल उपचार संयंत्र की क्षमता 270 MLD है. दोनों संयंत्रों की कुल क्षमता 670 MLD है.
- गर्मी के मौसम में पानी की डिमांड 700 MLD से अधिक हो जाती है.
- 494 बोरवेल नगर निगम के हैं. बोरवेल से 100 MLD पेयजलापूर्ति की जाती है.
