जींद | हरियाणा के जींद जिले से एक गौरवमई खबर सामने आई है. जींद जिले के हरदीप सिंह ने भारतीय सेना (Indian Army) में लेफ्टिनेंट के पद पर कामयाबी हासिल की है. पिता का साया न होते हुए भी हरदीप ने अपना हौंसला बरकरार रखा और 9 बार कोशिश करने के बाद अपना मुकाम हासिल किया.
संघर्ष की लंबी दास्तां
लेफ्टिनेंट बनने के पीछे हरदीप के दर्द और संघर्ष की लंबी दास्तां है. हरदीप जब 2 साल का था तो उस दौरान एक हादसे में उसके पिता का निधन हो गया था. परिवार की जिम्मेदारियां का बोझ उसकी माता पर आ गया था, लेकिन उसकी माता ने हार नहीं मानी और अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी.
हरदीप का सिलेक्शन आर्मी में एयरमैन के पद हुआ था, लेकिन केंद सरकार ने आर्मी सेवाओं को अग्निवीर में बदल दिया और फिर हरदीप की नौकरी हाथ से छूट गई. नौकरी छूटने के बाद भी हरदीप ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत जारी रखी. कई वर्षों तक मेहनत के बाद उसने GDS की परीक्षा पास की और अब वह थल सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चुने गए.
हासिल किया 54वां रैंक
हरदीप ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई गांव में ही की. हरदीप ने बताया कि इस परीक्षा में 9वां प्रयास था और अब जाकर सफलता हासिल की है. उसने अखिल भारतीय मेरिट सूची में 54वां स्थान हासिल किया है. हरदीप बताते है कि पिता को खोने के बाद माता ने स्कूल में मिड- डे मील वर्कर के तौर पर काम किया, उन्हें महीने के 800 रुपए सैलरी मिलती थी. वे छोटी- सी जमीन में खेतीबाड़ी करते थे, लेकिन अब परिवार और उनके संघर्ष की बदौलत वह अपनी मंजिल तक पहुंचे है. उनके परिवार में खुशी का माहौल है.
