चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) ने प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने धान की खेती के बाद पराली की व्यवस्था करने वाले किसानों को एक निश्चित राशि देने का निर्णय लिया है. इसका एक फायदा यह होगा कि प्रदूषण कम होगा, दूसरा मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी और किसानों को भी फायदा होगा. कुल मिलाकर यह निर्णय किसानों के हित में है.
मिलेगी इतनी राशि
पराली को खेत में ही काटकर मिट्टी में मिला देना या पशुओं को चारे के रूप में देना इत्यादि व्यवस्था करने वाले किसानों को 1200 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से एक निश्चित राशि मिलेगी. किसानों को यह राशि नए साल के पहले सप्ताह से मिलनी शुरू हो जाएगी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के माध्यम से पराली जलाने वाले किसानों का डाटा इकट्ठा किया गया, हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा पराली जलाने वाले गांवों को रेड से ग्रीन और येलो से ग्रीन जोन में शामिल किया जाएगा.
हरियाणा कृषि एवं कल्याण विभाग के तहत करीब 41 लाख एकड़ क्षेत्रफल में धान की बिजाई की गई थी. इसमें से करीब 22 लाख एकड़ में बासमती और करीब 18 लाख एकड़ में नॉन बासमती धान का क्षेत्रफल था, जिसमें से करीब 85.5 मीट्रिक टन पराली निकली थी. विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, खेत के अंदर 44.4 लाख मीट्रिक टन और 19 लाख मीट्रिक टन पराली खेत के बाहर व्यवस्था का डाटा इकट्ठा किया है. इसके अलावा 22 लाख मीट्रिक टन पराली को चारे में रूप में व्यवस्थित किया.
प्रदूषण पर नियंत्रण में सहायक
सरकार का यह फैसला पराली जलाने के मामलों में कमी लाएगा. किसान पराली को जलाने के बजाए पशुओं के चारे के रूप में उपयोग कर सकते है. इससे एक तो प्रदूषण कम होगा, दूसरा मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी. प्रदूषण का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है, जिससे सांस संबंधी बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, पिछली साल की बजाए अब की बार पराली जलाने के मामलों में कमी आई है. किसान लगातार जागरूक हो रहे है और भविष्य में पराली जलाने के मामले न के बराबर होने की संभावना है.
