चंडीगढ़ | पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव का बिगुल बज गया है. यहां मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए 29 जनवरी को वोटिंग होगी. इस बार का चुनाव पार्षदों के हाथ खड़े कर कराया जाएगा जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना खत्म हो गई है. हालांकि, अब आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने पार्षदों को बीजेपी में शामिल होने से रोकना बनी हुई है.
सबसे बड़ी पार्टी बनी थी AAP
साल 2021 के चुनाव में 14 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी लेकिन अब तक केवल एक बार ही अपना मेयर बना पाई है. ऐसे में वर्तमान स्थिति को देखते हुए चंडीगढ़ प्रभारी एसएस अहलूवालिया ने राष्ट्रीय प्रभारी जनरैल सिंह के साथ बैठक करते हुए पार्षदों की मौजूदा स्थिति और पार्टी छोड़ कर बीजेपी में गए नेताओं को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने बचे हुए पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दिया.
दिसंबर 2021 में हुए नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी लेकिन अब उसके पार्षदों की संख्या घटकर 11 रह गई है. वहीं, बीजेपी ने जोड़- तोड़ की राजनीति करते हुए पार्षदों की संख्या 12 से बढ़ाकर 18 कर ली है. कांग्रेस के पास 6 पार्षद और एक सांसद मनीष तिवारी का वोट हैं. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पास सांसद के वोट को मिलाकर बीजेपी के बराबर वोट हैं. ऐसे में मेयर पद के लिए दोनों खेमों को महज एक एक्स्ट्रा पार्षद के वोट की जरूरत है. यहीं वजह है कि जोड़- तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है.
AAP के लिए तगड़ी चुनौती
नगर निगम का मौजूदा कार्यकाल इसी साल समाप्त हो रहा है. एक साल की मेयर शिप के इस आखिरी साल में आम आदमी पार्टी के लिए मेयर बनाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा. कांग्रेस के समर्थन के बावजूद पार्टी अब तक लगातार चूकती रही है. इस बार मुकाबला सिर्फ 1 वोट पर टिका हुआ है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि मेयर का ताज कौन-सी पार्टी के सिर पर सजेगा.
