गुरुग्राम | सालों से जलभराव का दंश झेल रहे गुरुग्राम शहर से एक राहत भरी खबर सामने आई है. दशकों पुरानी इस समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर निगम ने एक ऐसा डिजिटल रोडमैप तैयार किया है जिससे बारिश शुरू होने से पहले ही खतरे की तस्वीर साफ हो जाएगी. इसके लिए नगर निगम ने IIT गांधीनगर के साथ एक आधुनिक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की हैं.
इस प्रोजेक्ट को ‘रेन-टू-रेजिलिएंस’ नाम दिया गया है, जिसका मकसद बारिश की आपदा से पहले चेतावनी जारी करना है. वैज्ञानिक मॉडलिंग और स्मार्ट सेंसरों के जरिए यह पता किया जा सकेगा कि बारिश के बाद शहर के किस कोने में कितना पानी जमा होने वाला है.
गुरुग्राम कंट्रोल रूम से मिलेगी जानकारी
इस प्रोजेक्ट के तहत शहर के उन इलाकों की पहचान की जाएगी, जहां हर साल जलभराव से ज्यादा हालात खराब रहते हैं. इन संवेदनशील क्षेत्रों में मेड- इन- इंडिया फ्लड सेंसर लगाए जाएंगे. ये सेंसर सिर्फ पानी की ऊंचाई ही नहीं बताएंगे बल्कि नालियों और ड्रेनेज पाइपों में जमी गंदगी और सिल्ट की जानकारी भी सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचाने का काम करेंगे.
गुरुग्राम नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि डेटा आधारित प्लेटफॉर्म ‘एक्वा ट्विन’ और ‘रेन-टू-फ्लड की मदद से यह अनुमान पहले ही लग जाएगा कि किस इलाके में कितनी बारिश के बाद स्थिति खराब हो सकती है. इससे नगर निगम की टीमें जलभराव से पहले ही मौके पर पहुंचकर आवश्यक कदम उठा सकेगी.
पहले 12 महीने मुफ्त मिलेगा लाभ
आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह प्रयोग नगर निगम के लिए ज्यादा खर्चीला नहीं होगा. पहले 12 महीने तक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल निशुल्क रहेगा. निगम को केवल सेंसर लगाने पर करीब 20 लाख रुपए खर्च करने होंगे. यदि पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिले तो इसे पूरे गुरुग्राम शहर में लागू किया जाएगा.
नगर निगम को उम्मीद है कि इस पहल के बाद गुरुग्राम देश का पहला ऐसा शहर बन सकता है जहां बाढ़ और जलभराव से निपटने के फैसले अनुमान नहीं बल्कि डेटा के आधार पर लिए जाएंगे.
