हिसार | किसानों के लिए एक और अच्छी खबर सामने आई है. खरीफ सीजन से पहले चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) धान, ज्वार और मूंगफली की एक- एक और कपास की 3 नई किस्में अनुमोदित की है. HAU में आयोजित दो दिवसीय कृषि अधिकारी कार्यशाला के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंचे कुलपति प्रो. बलदेव राज ने कहा कि कार्यशाला में तय सिफारिशों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए ताकि आगामी खरीफ सीजन में उनका पूरा लाभ मिल सके.
मूंग की फसल के लिए सलाह
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग ने अपने संबोधन में राज्य में मूंग का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित करने और ग्रीष्मकालीन मूंग की बिजाई मार्च के दूसरे पखवाड़े से अप्रैल के पहले पखवाड़े तक करने की सलाह दी. दक्षिण- पश्चिम हरियाणा में मूंग के अच्छे उत्पादन के लिए उन्होंने बताया कि किसान साथी 2 किलोग्राम पोटासियम नाइट्रेट (13:00:45) को 200 लीटर पानी में घोलकर फूल निकलने और फलियां बनाते समय दो बार छिड़काव करें.
कपास व धान की नई किस्में अनुमोदित
HKR- 49(धान): अर्ध- बौनी, जल्दी पकने वाली और अधिक पैदावार देने वाली किस्म 120 दिन में तैयार, दाने लंबे- पतले (सुपरफाइन) DSR विधि में उपयुक्त. औसत उत्पादन 32 क्विंटल प्रति एकड़ और अधिकतम उत्पादन 38 क्विंटल प्रति एकड़.
RCH- 846 BG2( कपास) : बीटी संकर किस्म, समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त. अवधि 150- 160 दिन, औसत पैदावार 14.75 क्विंटल प्रति एकड़.
RCH951 BG2 (कपास): बीटी संकर किस्म, अवधि 160- 170 दिन. औसत पैदावार 15.7 क्विंटल प्रति एकड़.
रघुवीर BG2 (कपास): बीटी संकर किस्म, अवधि 150- 160 दिन. औसत पैदावार 14.13 क्विंटल प्रति एकड़.
GNH- 804 (मूंगफली): सिंचित क्षेत्र में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त सीधी व गुच्छेदार किस्म. औसत उपज 10- 12 क्विंटल प्रति एकड़, तेल मात्रा 52%, अवधि 120-130 दिन.
CSV- 64F (चारा ज्वार): उत्तर भारत के चारा उत्पादक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त. एक कटाई वाली मीठास युक्त किस्म. हरे चारे की पैदावार 185- 190 क्विंटल प्रति एकड़.
