चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में युवाओं के हित में एक बड़े फैसले को मंजूरी दी गई है. इस मीटिंग में एक साथ 10 नई औद्योगिक नीतियों को मंजूरी दी गई है. इनमें सबसे बड़ी ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति’ के तहत अगले 5 साल में 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है.

कैबिनेट मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बताया कि सरकार ने पुरानी A, B, C और D ब्लॉक व्यवस्था समाप्त कर कोर, इंटरमीडिएट, सब-प्राइम व प्राइम/ फोकस क्षेत्र की व्यवस्था लागू की है. इन नीतियों के तहत निवेशकों को 100% तक स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति, 30% से 70% तक एसजीएसटी प्रतिपूर्ति और बुनियादी ढांचे पर 30% तक पूंजीगत सब्सिडी मिलेगी.
युवाओं को रोजगार दिलाने पर फोकस
खास बात यह है कि स्थानीय (हरियाणा के) युवाओं को रोजगार देने पर मिलने वाली रोजगार सृजन सब्सिडी 48 हजार से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपए सालाना तक कर दी है. उद्योगों में हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के जरिए भर्ती करने पर नियोक्ता व कर्मचारी दोनों के ईपीएफ अंशदान की 100% प्रतिपूर्ति सरकार 5 सालों तक करेगी. औद्योगिक नीतियों के जरिए मुख्य फोकस AI, IT, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, ग्रीन एनर्जी, खिलौना और एग्रो-बिजनेस को बढ़ावा देने पर हैं.
इन्हें मिलेगी सब्सिडी
- कोई कंपनी स्थानीय युवाओं को रोजगार देती है तो कंपनी को उनपर 10 साल तक प्रति कर्मचारी 1 लाख रुपए सालाना सब्सिडी दी जाएगी. महिला, एससी, दिव्यांगजन, अग्निवीर व पूर्व सैनिकों को रोजगार देने पर यह राशि 1.20 लाख रुपए होगी.
- HKRN के जरिए भर्ती करने पर नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के हिस्से के ईपीएफ अंशदान की 100% राशि सरकार 5 सालों तक जमा करेगी. इससे कंपनी का भी पैसा बचेगा और साथ ही कर्मचारी को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.
- घरेलू इंडस्ट्री शिफ्ट करने पर 5 करोड़ और अंतर्राष्ट्रीय यूनिट लाने पर 10 करोड़ तक मदद मिलेगी. घरेलू पेटेंट कमर्शियलाइज करने पर 50 लाख और इंटरनेशनल पेटेंट पर 1 करोड़ रुपए मिलेंगे.
इतने दिन में मिलेगा क्लीयरेंस
सिंगल विंडो से क्लीयरेंस मिलेगी. भूमि व्यवहार्यता प्रमाणपत्र के माध्यम से भूमि स्वामित्व, भू- उपयोग (सीएलयू) और अनुमतियों की स्थिति 45 कार्य दिवसों में स्पष्ट करनी होगी.