हिसार | हरियाणा के हिसार जिले से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आई है. बता दें कि शहर के भविष्य को नई यातायात दिशा देने वाली 41 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना अब नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) हिसार के बजाय चंडीगढ़ स्थित टीम के अधीन पहुंच गई है.

रिंग रोड के लिए बढ़ा इंतजार
इस परिवर्तन के साथ ही परियोजना के नक्शे, मार्ग और तकनीकी स्वरूप में बड़े बदलावों की संभावना तेज हो गई है. दिल्ली में इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही थी, लेकिन अब हिसारवासियों को इस महत्वाकांक्षी रिंग रोड के लिए अभी इंतजार करना होगा. यह रिंग रोड आने वाले समय में हिसार शहर को जाम, धुएं और भारी वाहनों के दबाव से राहत देने का आधार बनेगा. खास बात यह है कि कांडला बंदरगाह, जयपुर, अजमेर और दिल्ली की ओर आवाजाही करने वाले भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश किए बिना नया बाईपास मार्ग उपलब्ध होगा.
DPR में बड़े बदलाव की संभावना
रिंग रोड किन गांवों से होकर निकलेगा, इसे लेकर लंबे समय से असमंजस बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रस्तावित नक्शों में बदलाव किए गए, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है. अब यह मामला चंडीगढ़ कार्यालय तक पहुंच चुका है. सूत्रों के अनुसार, अब चंडीगढ़ और दिल्ली की तकनीकी टीमें मिलकर पूरे मार्ग का पुनर्मूल्यांकन करेंगी और उसी आधार पर अंतिम नक्शा तैयार किया जाएगा. इससे परियोजना में नई तकनीकी और यातायात आवश्यकताओं के अनुरूप बदलाव संभव माने जा रहे हैं.
मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार तलवंडी मोड़ से गांव ढंदूर होते हुए मुकलान तक लगभग 26 किलोमीटर का बाईपास पहले से मौजूद है. इसके आगे नया मार्ग मुकलान से कैमरी, मिरका, लाड़वा, भगाना, मय्यड, खरड़, न्याणा और धांसू गांवों से होकर दोबारा तलवंडी बाईपास से जुड़ने का प्रस्ताव था. अब चंडीगढ़ टीम द्वारा परियोजना संभाले जाने के बाद इस पूरे मार्ग में बदलाव की संभावना जताई जा रही है.
रिंग रोड का रूट
प्रस्तावित रिंग रोड करीब 41 किलोमीटर लंबा होगा. यह हिसार-राजगढ़ रोड स्थित NH-52 से शुरू होकर हिसार- दिल्ली हाइवे (NH- 9) को पार करता हुआ हिसार- कैथल रोड NH- 52 तक पहुंचेगा. इस परियोजना पर अनुमानित 1900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिनमें लगभग एक हजार करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च होंगे.