नई दिल्ली | चौतरफा महंगाई की मार झेल रहे लोगों को फिलहाल राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है. पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लगभग साढ़े 7 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने के बावजूद भी सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों का कहना है कि उन्हें रोजाना 600 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है.

ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस घाटे (तेल कंपनियां जिसे अंडर रिकवरी कहती हैं) को पूरा करने के लिए तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी 10 रुपए तक और बढ़ोतरी कर सकती हैं. 15 मई से पूर्व तेल कंपनियां यह कह रही थीं कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से उन्हें रोजाना 1 हजार करोड़ का घाटा हो रहा है.
तेल कंपनियों ने कमाया बंपर मुनाफा
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कंपनियां जिस घाटे की बात करती हैं, उनमें LPG और एयर टर्बाइन फ्यूल की लागत भी शामिल है. LPG पर सरकार सब्सिडी भी देती है. विशेषज्ञ इस बात पर भी सवाल उठा रहे हैं कि वित्त वर्ष 2025- 26 की अंतिम तिमाही (जनवरी- मार्च) के मार्च माह में कच्चे तेल के दाम में खासी वृद्धि के बावजूद इन तीनों तेल कंपनियों ने संयुक्त रूप से 77,280 करोड़ रुपए का बंपर मुनाफा कमाया.
गैस सब्सिडी की भरपाई का गजब आइडिया
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की लागत में 90% हिस्सेदारी कच्चे तेल की कीमत की होती है. दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि तेल कंपनियां अंडर रिकवरी की जो बात करती है, उसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं करती हैं कि उनमें पेट्रोल- डीजल ही शामिल है या और कौन- कौन से आइटम शामिल हैं. जानकार कहते हैं कि गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी की भरपाई भी पेट्रोल- डीजल की खुदरा कीमत में बढ़ोतरी करके की जाती है.
कच्चे तेल के भाव का खेल
खाड़ी देशों में जारी तनाव के चलते मार्च 2026 में तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की खरीदारी औसतन 113 डालर प्रति बैरल की दर से की थी. गत फरवरी में तेल की औसत कीमत 69 और जनवरी में 63 डालर प्रति बैरल थी. अप्रैल में कच्चे तेल की औसत खरीद कीमत 114 डालर हो गई. मई में यह 107 डालर प्रति बैरल बताई जा रही है. सोमवार को तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 97 डालर प्रति बैरल से नीचे दर्ज की गई है.