चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने अदालतों में लंबित पेंशन संबंधी मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. वित्त विभाग ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि न्यायालयों में दायर किए जाने वाले जवाब और लिखित बयान तय समयसीमा के भीतर दाखिल किए जाएं. पेंशन मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सकती है. अदालतों में समय पर और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत नहीं होने से राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है.

कई मामलों में सरकार के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी उदाहरण भी स्थापित हो सकते हैं. ऐसे मामलों में जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी और विभाग की मानी जाएगी. विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि 29 जनवरी 2018 को जारी निर्देशों के तहत पेंशन संबंधी न्यायिक मामलों में वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार (AG) कार्यालय की ओर से संयुक्त जवाब दाखिल करने की व्यवस्था पहले से लागू है.
हरियाणा सरकार सख्त
कई मामलों में जवाब दाखिल करने में देरी और विभागों के बीच समन्वय की कमी सामने आई है. इसी स्थिति को देखते हुए वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि पेंशन मामलों से जुड़े जवाबों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाए और अदालतों में निर्धारित समय के भीतर दाखिल किया जाए. विभागों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी तथ्य और आवश्यक दस्तावेज समय रहते उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी प्रकार की कानूनी बाधा उत्पन्न न हो. सरकारी निर्देशों के अनुसार, पेंशन मामलों में तैयार किया गया संयुक्त जवाब महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से अदालत में दाखिल किया जाएगा. इसके लिए संबंधित विभागों, वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है.
तय होगी जवाबदेही
वित्त विभाग ने अपने पत्र में साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही के कारण अदालत में राज्य सरकार का पक्ष कमजोर पड़ता है, सरकार को आर्थिक नुकसान होता है या उसके खिलाफ प्रतिकूल फैसला आता है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. पेंशन मामलों में न्यायालय अक्सर समयबद्ध जवाब मांगते हैं. ऐसे में जवाब दाखिल करने में देरी होने पर अदालतें एकतरफा आदेश भी पारित कर सकती हैं जिसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ सकता है.
राज्य सरकार ने ये निर्देश सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भेजे हैं. सरकार का उद्देश्य पेंशन विवादों से जुड़े मामलों में एक समान, तथ्यात्मक और समयबद्ध पक्ष अदालत के सामने रखना है ताकि अनावश्यक मुकदमेबाजी कम हो और सरकारी संसाधनों की रक्षा की जा सके.