हिसार । इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आपको बहुत आनंद देने वाली है. भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस बार खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार चार योग ऐसे बन रहे हैं जो कभी-कभार ही बनते हैं, इस वजह से यह जन्माष्टमी भारतीय जोतिष अनुसंधान केंद्र के निदेशक पंडित राजेंद्र प्रसाद कौशिक बताते हैं कि सोमवार को रात के 12 बजे रोहिणी नक्षत्र पर चंद्रमा और अष्टमी तिथि होगी। चंद्रमा वृष राशि में है.
इसके साथ ही सूर्य सिंह राशि में है. ऐसे में ये चार योग जब भी मिलते हैं तो संपूर्ण जनमाष्टमी कही जाती है. इस बार ये सभी योग श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहे हैं. यह सबसे श्रेष्ठ जन्माष्टमी है जो कई वर्षों मे कभी-कभी आती है. सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. इसके साथ ही इस बार एक ही दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी. जबकि अन्य वर्षों में अलग-अलग दिनों पर भी लोग जन्माष्टमी मनाया करते हैं.
इस योजना से यह होंगे लाभ
इस योग में वृत करने से जीवन में समृद्धि आएगी. साथ ही आनंद और धनधान्य की बढ़ोतरी होगी. इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर वृत रख जरूर पूजा अर्चना करें. पंडित कौशिक बताते हैं कि वृत रखने वालों को इसका लाभ जरूर मिलेगा. इस वृत को करने के लिए सबसे पहले मन में गुरु का ध्यान करें. अगर किसी ने कोई गुरु नहीं बना रखा है तो अपने ईष्ट का नाम गुरु की तरह ले सकता है. दिनभर ऊं गोविंदाय नम:, ऊं श्री कृष्णाय नम:, ऊं नमो भगवते वासुदेवाय जैसे मंत्रों का उच्चारण कर सकते हैं. सभी लोगों को वृत के समय भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के नाम का बार-बार उच्चारण करते रहना चाहिए. रात्रि आठ बजे से 12 बजे तक भजन कीर्तन करें.
श्री कृष्ण की पूजा कैसे करें
सुबह नहाने के बाद लड्डू गोपाल को गंगाजल, दूध आदि से स्नान करा के सुला दें. दिन में श्रीमद् भागवत जैसी धार्मिक किताब पढ़ें, श्री कृष्ण भगवान के भजनों को गाएं. इसके बाद रात्रि स्नान करने के बाद 9 बजे से 12 बजे तक मंदिर में भी जा सकते हैं. यहां भगवान का भोग लगाकर चरणामृत गृहण कर सकते हैं. रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य जरूर देकर ही वृत खोलें.
गौरतलब है सोमवार रात के 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा और अष्टमी तिथि होगी. चंद्रमा वृष राशि में है. इसके साथ ही सूर्य सिंह राशि में है. ऐसे में ये चार योग जब भी मिलते हैं तो संपूर्ण जनमाष्टमी कही जाती है.
