परिवार पहचान पत्र बनवाने के लिए बड़ी राहत, यहां पर बनेंगी फैमिली आईडी

पंचकूला | हरियाणा सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को डिपो के माध्यम से सभी  परिवार पहचान पत्र बनवाने के लिए सभी सदस्यों के आधार कार्ड और परिवार के मुखिया की बैंक जानकारी को एकत्रित करने के लिए कहा गया है. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की डिपो होल्डर सिर्फ आधार कार्ड मांग रहे हैं और परिवार के मुखिया की पूरी जानकारी मांग रहे हैं.  इन दस्तावेजों को जमा करवाने की अंतिम तिथि 5 नवंबर 2020 है. ऐसे में विभाग के डिपो होल्डर के कर्मचारी ही नहीं विभाग के अधिकारी भी युद्ध स्तर पर काम करने में जुट गए हैं. गांव में मुनादी के माध्यम से डिपो होल्डर के पास कागजात जमा करवाने को कहा जा रहा है.

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अभी अधिक जानकारी का विभाग के अधिकारियों को भी नहीं पता. वह बता रहे हैं कि हमारे पास एक आदेश पत्र आया है जिसमें डिपो होल्डर के अधीन आने वाले सभी परिवारों के आधार कार्ड और उस परिवार के मुखिया की बैंक डिटेल्स को एकत्र किया जाना है. कयास लगाया जा रहा है की इससे खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के डिपो होल्डर उस परिवार के मुखिया की फैमिली आईडी को बना सकेंगे पर अन्य सदस्यों के सिर्फ आधार कार्ड की बदौलत परिवार पहचान पत्र को किस प्रकार बनाया जाएगा यह अभी संशय बना हुआ है ,क्योंकि परिवार पहचान पत्र बनवाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर और सरकारी स्कूलों में जो दस्तावेज मांगे जाते हैं उन दस्तावेजों में अन्य दस्तावेज जैसे पेन कार्ड, वोटर आईडी, सभी सदस्यों की बैंक डिटेल्स भी शामिल होते हैं.

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कुछ अधिकारी बता रहे है कि इन दस्तावेजों से फैमिली के मुखिया के नाम से परिवार पहचान पत्र को बनाया जा सकेगा और बाद में उस परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी जोड़े जा सकेगें. वही कॉमन सर्विस सेंटर के संचालक बताते हैं कि परिवार पहचान पत्र में एक बार भरी गई जानकारी में बदलाव नहीं किया जा सकता ऐसे में अनेक लोगों के गलत आंकड़े जमा हो गए और वह लोग उसमें सही जानकारी को अद्यतन नहीं करवा पा रहे है.

फैमिली आईडी हरियाणा सरकार के द्वारा लांच की गई एक नई पहल है जिसे हरियाणा में किसी भी परिवार को दी जाने वाली सुविधाओं और योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाएगा इससे हरियाणा में सभी परिवारों की पहचान हो पाएगी और सरकार नई योजनाओं को इन आंकड़ों के माध्यम से आसानी से लागू कर सकेंगे.

इस जानकारी से हरियाणा सरकार अपने बजट का भी सही आकलन कर पाएगी क्योंकि अभी जनगणना के आंकड़ों का ही प्रयोग सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किया जाता है जिससे बहुत से अपव्यय हो जाता है लेकिन अब सरकार लक्षित लोगों और परिवारों तक अपनी योजनाओं को पहुँचा सकेगी.

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Manisha Mandholi
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