पंचकुला | देश में धनतेरस का त्यौहार कल पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. इस त्यौहार के बारे में कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जो हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखती हैं. इस दिन कुछ विशेष प्रयोजन के साथ दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है.
जिसके बारे में प्रचलित कथन यह है कि एक बार दूत ने यमराज से पूछा कि क्या वह लंबी आयु प्राप्त करने का कोई जरिया बता सकते हैं जिससे उन्हें अकाल मृत्यु का शिकार ना होना पड़ेगा .तभी यम ने दक्षिण दिशा में दीपदान के बारे में बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति दक्षिण दिशा में दीपदान करता है तो उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती.

क्या है धनतेरस मनाने के पीछे का महत्व?
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र से धन से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे. तभी से इस दिन घर में कुछ आभूषण, बर्तन व अन्य चीजें खरीदने की शुरुआत हुई एवं मान्यता स्थापित हुई कि ऐसा करने से पूरे वर्ष घर मे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है व यश ,वैभव की प्राप्ति होती है. धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि के अलावा मां लक्ष्मी की भी एक पौराणिक कथा प्रचलित है जो इस प्रकार है:-
इसके अनुसार एक बार भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी जिद्द करके मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आई थी. वहीं जब भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी से कहा कि मैं दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा हूं जब तक आप इसी स्थान पर ठहरना एवं मेरा पीछा मत करना. परन्तु लक्ष्मी जी को थोड़ी आगे एक सरसों का खेत दिखा जो बहुत खूबसूरत था जिसको देखकर मां लक्ष्मी मंत्रमुग्ध हो गई है व उनसे रुका नहीं गया इसलिए भगवान विष्णु के पीछे-पीछे चलने लगी. ऐसे ही थोड़ी दूर चलने पर उन्हें गन्ने के खेत दिखे जहां वह गन्ने के रस का पान करने लगी.
जिसे भगवान विष्णु ने देख लिया एवं किसान के खेत में चोरी करने के आरोप में उन्हें 12 वर्ष तक किसानों की सेवा करने के लिए मृत्युलोक में छोड़कर स्वयं क्षीर सागर की ओर प्रस्थान कर गए. इस तरह 12 वर्ष तक लक्ष्मी जी ने किसान का घर धन-धान्य से भर दिया है व बहुत आराम से वहां रही . इसके पश्चात जब विष्णु जी उन्हें लेने आए तो किसान ने उन्होंने ले जाने से मना कर दिया.
ऐसे में लक्ष्मी जी ने किसान की पत्नी को बताया कि कल धनतेरस है एवं इस दिन तुम अपने घर में पूरी रात दीपक जलाकर व एक कलश लेकर उसमें सिक्के भरकर रखो जिससे मैं पूरे साल तुम्हारे घर में विराजमान रहूंगी, जब किसान ने ऐसा किया तो उनका घर सब तरह की सुख सम्पत्ति से भर गया. अतः इसी दिन से धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी का पूजन आरम्भ हो गया .
