नई दिल्ली | आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई नजदीक आने के साथ ही रिटर्न फाइल करने की रफ्तार बढ़ गई है. कर विशेषज्ञों ने करदाताओं से अपील की है कि अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते ITR दाखिल कर दें. तय समय सीमा के बाद रिटर्न भरने पर 1,000 से 5,000 तक की लेट फीस चुकानी पड़ सकती है. इसके अलावा, बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना होगा. बाद में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकेगा.

वरिष्ठ कर अधिवक्ता एवं CA शशांक शेखर गुप्ता ने बताया कि ITR दाखिल करने से पहले सभी करदाताओं को अपना Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS जरूर मिलान करना चाहिए. इससे आय, टैक्स कटौती और अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो सकेगी.
ITR भरने में न करें देरी
उन्होंने बताया कि AIS में पूरे वर्ष के वित्तीय लेनदेन, जैसे बैंक ब्याज, शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग, डिविडेंड, संपत्ति की खरीद-बिक्री समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होती हैं. यदि ITR में दी गई जानकारी AIS या आयकर विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जा सकता है. सही दस्तावेजों के आधार पर समय पर ITR दाखिल करने से जुर्माने और ब्याज से बचा जा सकता है. साथ ही, रिफंड मिलने की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है.
होंगे यह नुकसान
- 31 जुलाई के बाद ITR दाखिल करने पर ₹1,000 से ₹5,000 तक लेट फीस लग सकती है.
- बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना होगा.
- AIS और ITR की जानकारी में अंतर होने पर आयकर विभाग नोटिस भेज सकता है.
- समय पर रिटर्न दाखिल करने से टैक्स रिफंड जल्दी मिलने की संभावना रहती है.