चंडीगढ़ | हरियाणा की नायब सैनी सरकार विधानसभा शीतकालीन सत्र की तैयारियों में जुट गई है. सरकार 6 से ज्यादा अध्यादेश विधानसभा के पटल पर रखेगी. इससे न केवल आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि उद्योगों को भी फायदा होगा. इनमें से 3 अध्यादेश को सूचीबद्ध कर दिया है और बाकि के 1 से 2 दिन में सूचीबद्ध कर दिए जाएंगे.
राज्य सरकार की ओर से विधानसभा कार्यालय को भेजी गई जानकारी के अनुसार दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश- 2025, हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश- 2025, हरियाणा जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अध्यादेश- 2025, हरियाणा हाउसिंग बोर्ड (संशोधन) विधेयक- 2025 व हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितिकरण, अभिलेखन एवं सामाधान) अध्यादेश समेत 6 विधेयक पेश किए जाएंगे.
रोजाना होगा 10 घंटे काम
हरियाणा दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश- 2025 के अनुसार 20 से कम कर्मचारियों वाली छोटी इकाइयों को केवल ऑनलाइन स्व- घोषणा देनी होगी. उनके पंजीकरण, संशोधन और बंद करने से संबंधित सभी कार्य ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होंगे. दुकानों और प्रतिष्ठानों में दैनिक कार्य अवधि 9 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे कर दी गई है. साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे ही रहेगी. इससे व्यवसायों को अपने बिजी समय में कार्य प्रबंधन में सुविधा मिलेगी. सभी नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र जारी करना अनिवार्य होगा.
40 फीसदी कोरम जरूरी
हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश के अनुसार किसी भी सरकारी योजना के योग्य लाभार्थियों पर विचार और उन्हें मंजूरी देने के लिए होने वाली ग्राम सभा की बैठक का कोरम कुल सदस्यों का 40% होगा. कोरम पूरा नहीं होता तो सरपंच 1 घंटा इंतजार करेगा, लेकिन फिर भी कोरम पूरा नहीं होता तो बैठक को टाल दिया जाएगा. हरियाणा जन विश्वास ( प्रावधानों में संशोधन ) अध्यादेश के तहत 17 विभागों के 164 प्रावधानों को आरोप मुक्त कर दिया जाएगा. सजा की बजाए सिर्फ जुर्माना लगाया जाएगा.
हाउसिंग बोर्ड का HSVP में विलय
हरियाणा हाउसिंग बोर्ड (संशोधन) विधेयक के अनुसार हरियाणा हाउसिंग बोर्ड का हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के साथ विलय को मंजूरी मिलेगी. सीएम ने 2025 – 26 के भाषण में हाउसिंग बोर्ड को रद्द कर उसके कार्य HSVP में व्यवस्थित करने की घोषणा की थी. हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितिकरण, अभिलेखन एवं समाधान) अध्यादेश के अनुसार आबादी देह में शामिल 31 लाख लोगों को अब मालिकाना हक मिलेगा. इसमें 25 लाख गांव की आबादी होगी और 6 लाख शहर की आबादी शामिल होगी.
