चंडीगढ़ | हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रदेशवासियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. बता दें कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देते हुए सूबे की नायब सैनी सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे (BPL) राशनकार्ड बनाने की प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है. पहले जहां लोगों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, आवेदन करना पड़ता था और दस्तावेज जमा कराने पड़ते थे, वहीं अब सरकार खुद राशनकार्ड बना रही है. वह भी बिना किसी आवेदन के.

कैथल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के सवाल के जवाब में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने विधानसभा में यह रिपोर्ट रखी है. इसमें बताया गया है कि BPL कार्ड प्रबंधन अब पूरी तरह डिजिटल, स्वत और पारदर्शी हो चुका है. हमारी सरकार साल 2023 से BPL और AAY राशनकार्डों के लिए एक नई व्यवस्था लागू कर चुकी हैं.
फैमिली आईडी डेटा से बनेगा राशनकार्ड
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ने बताया कि नए नियमानुसार BPL कार्ड फैमिली आईडी के आय डेटा के आधार पर अपने आप बन जाता है. यदि परिवारों की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपए तक है तो वे सीधे BPL श्रेणी में आ जाते हैं. किसी भी तरह का फॉर्म भरना, दस्तावेज जमा कराने या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने का झंझट अब खत्म हो चुका है. अब सरकार निर्धारित करती है कि किस परिवार को बीपीएल सूची में शामिल करना है. सरकार राशनकार्ड बनाकर भी खुद ही देती है.
उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक, फैमिली आईडी और PDS डेटाबेस से जुड़ने के बाद प्रदेश में बीपीएल कार्ड का एक भी आवेदन पेंडिंग नहीं है. हर महीने नए बीपीएल कार्ड अपने- आप बन रहे हैं और आमदनी में इजाफा या पात्रता खत्म होने पर अपने- आप ही राशनकार्ड रद्द भी हो रहे हैं.
भागदौड़ हुई खत्म
नया राशनकार्ड बनना या रद्द होना अब पूरी तरह डेटा आधारित है. पहले एक नया राशनकार्ड बनवाने में 15- 20 दिन का समय लगता था लेकिन अब राशनकार्ड के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं बल्कि फैमिली आईडी डेटा अपडेट होते ही उसी दिन बन जाता है. इस नई व्यवस्था से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सबसे बड़ी राहत पहुंचेगी क्योंकि अब उन्हें इसके लिए भागदौड़ करने की जरूरत नहीं रही है.