चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से एक नया फैसला सुनाया गया है. इसके अनुसार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार UR कैटेगरी में माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते. हाई कोर्ट के जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की तरफ से एक अहम आदेश सुनाते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में अगर कोई अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग की छूट का लाभ प्राप्त करता है तो वह बाद में सामान्य वर्ग में माइग्रेशन का दावा पेश नहीं कर सकता है.
यहां जानें एक मामला
वह उम्मीदवार रिजर्व केटेगरी का दावेदार ही रह जाता है. अगर एक मामले की बात करें तों हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सहायक पर्यावरण अभियंता (ग्रुप बी) पद के लिए भर्ती निकाली गई थी. 2 नवंबर 2025 को आयोजित स्क्रीनिंग टेस्ट में सामान्य वर्ग की कट- ऑफ 61.8132 रही थी जबकि याचिकाकर्ता ने 56.86 अंक प्राप्त किए. उसे सिर्फ बीसी बी श्रेणी में शिथिल कट- ऑफ का फायदा लेकर ही अगला चरण पार करने का मौका मिला.
माइग्रेशन का दायरा
जस्टिस बराड़ का कहना है कि बहु स्तरीय चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट एक अनिवार्य पात्रता चुनौती है न कि सिर्फ फॉर्मेलिटी. इस लेबल पर दी गई कोई भी छूट अभ्यर्थी को ठोस और निर्णायक लाभ प्रदान करती है क्योंकि उसी के आधार पर वह आगे के चरणों में बढ़ता है. हाई कोर्ट का कहना है कि जो आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी किसी भी चरण में छूट का लाभ हासिल करते हैं वे अनारक्षित रिक्तियों के विरुद्ध समायोजन के पात्र नहीं रहते.
