हरियाणा में नहीं दे सकेंगे अब सीधे कोर्ट में चुनौती, सरकारी आदेशों से पहले करनी होगी विभागीय सुनवाई

चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) ने तय किया है कि अब कर्मचारी किसी भी सरकारी आदेश को सीधे अदालत में चुनौती नहीं दे सकेंगे. इससे पहले उन्हें अपनी शिकायत संबंधित विभाग की शिकायत निवारण समिति के समक्ष रखनी होगी. मुख्य सचिव संजीव कौशल ने सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर मुख्यालय और जिला स्तर पर समितियों के गठन की रिपोर्ट प्रशासनिक न्याय विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं.

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हर विभाग और संस्था में बनेगी समिति

सभी विभागों और स्वायत्त संस्थाओं में एक कर्मचारी शिकायत निवारण समिति गठित की जाएगी. यह समितियां स्टेट लिटिगेशन पॉलिसी के तहत काम करेंगी और गठन के 15 दिन के भीतर सक्रिय हो जाएंगी. शिकायतों का निपटारा 8 सप्ताह के अंदर करना अनिवार्य होगा. समिति में विभागीय अधिकारी के साथ प्रशासनिक सचिव और वित्त विभाग का प्रतिनिधि भी शामिल होगा. कर्मचारी अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे.

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ऑनलाइन दर्ज होगी शिकायत

शिकायत मिलने के 7 दिनों के भीतर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करनी होगी. कर्मचारी समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रख सकेंगे. यदि किसी को समिति के निर्णय से असंतोष है, तो वह प्रमुख सचिव को अपील कर सकता है. इस नई प्रणाली से अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जा सकेगा. सभी विभागों को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से एक समर्पित सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म विकसित करना होगा, जहां कर्मचारी शिकायत दर्ज करने के साथ उसकी स्थिति भी ट्रैक कर सकेंगे. इससे जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी.

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Nisha Tanwar
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