चंडीगढ़ | NCR क्षेत्र में शामिल शहरों में प्रदुषण कम करने की कवायद में जुटी हरियाणा सरकार (Haryana Govt) के लिए एक और अच्छी खबर सामने आई है. बता दें कि वर्ल्ड बैंक ने हरियाणा स्वच्छ वायु परियोजना फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (HCAPSD) के लिए 305 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद को मंजूरी प्रदान की है. इसमें 300 मिलियन डॉलर का IBRD लोन और 5 मिलियन डॉलर की सब्सिडी शामिल हैं.
इस परियोजना का लक्ष्य साल 2030 तक हरियाणा प्रदेश के वातावरण को स्वच्छ और प्रदुषण मुक्त बनाना है. इस संबंध में नवंबर, 2024 में चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सैनी और वर्ल्ड बैंक अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई थी जिसमें इस परियोजना पर विस्तार से चर्चा की गई थी. उस दौरान बैंक ने लगभग 2,498 करोड़ रुपए की लोन राशि का आश्वासन दिया था.
एक्शन प्लान को करेगा सपोर्ट
यह प्रोजेक्ट हरियाणा के एक्शन प्लान को सपोर्ट करते हुए वायु गुणवत्ता और एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम में इन्वेस्ट करेगा ताकि प्रदेश के अलग- अलग प्रदुषण के सोर्स के असर को बेहतर ढंग से मापने की क्षमता को मजबूत किया जा सकें. इस परियोजना में परिवहन क्षेत्र के लिए 1,688 करोड़ रुपए की धनराशि निर्धारित की गई है जिसका लक्ष्य शहरी परिवहन उत्सर्जन में तेजी से कमी लाना और प्रदेश के स्वच्छ मोबिलिटी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है.
इन शहरों में चलेगी इलेक्ट्रिक बसें
गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर और सोनीपत जिले में 1,513 करोड़ रुपए की लागत से 500 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा. उच्च- प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने एवं स्क्रैपिंग इकोसिस्टम के लिए 10 करोड़ रुपए, 200 इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करने के लिए 20 करोड़ रुपए, इलेक्ट्रिक थ्री- व्हीलर इंसेंटिव और 45 करोड़ रुपए पुराने थ्री- व्हीलर्स को EV में बदलने हेतु फ्लीट रिप्लेसमेंट इंसेंटिव पर व्यय किए जाएंगे. यह कार्य गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन सिटी बस लिमिटेड, हरियाणा सिटी बस सर्विस लिमिटेड तथा परिवहन एवं उद्योग विभागों के माध्यम से संयुक्त रूप से किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र में खर्च होंगे 746 करोड़
वर्ष 2030 तक पराली जलाने को समाप्त करने के लिए 280 करोड़ खर्च किए जाएंगे. कृषि एवं विकास तथा पंचायत विभागों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में 746 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. बायो – डीकंपोजर तकनीकों पर अनुसंधान के लिए 52 करोड़ रूपए, कृषि विभाग में एक सेकेंडरी एमिशन मॉनिटरिंग सेंटर की स्थापना के लिए 151 करोड़ रूपए और पशु अपशिष्ट से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने व स्वच्छ खाद प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए 263 करोड़ रुपए शामिल है.
PNG में बदले जाएंगे बायलर
उद्योग और वाणिज्य विभाग द्वारा 563 करोड़ स्वच्छ औद्योगिक संचालन, रियल- टाइम उत्सर्जन नियंत्रण एवं अनुपालन सुधार पर खर्च किए जाएंगे. इसमें 100 करोड़ रुपए औद्योगिक बायलरों को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) में शिफ्ट करने, 330 करोड़ रूपए उत्सर्जन विकल्पों को बढ़ावा देकर डीजल जनरेटर सेट के प्रतिस्थापन हेतु तथा 33 करोड़ रुपए प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाने के लिए है.
