फरीदाबाद की बबीता दीदी ने ढूंढा कमाई का नया जरिया, कचरे की खाद से किसानों को दे रही दोगुना लाभ

फरीदाबाद | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक अद्भुत प्रयास किया जा रहा है. बबीता सिंह नामक एक महिला ने यूट्यूब से प्रेरणा लेकर इस काम को शुरू किया. उनकी सोसाइटी हर महीने 100 किलो से ज्यादा खाद बनाती है. यह खाद फरीदाबाद सहित दिल्ली और गुरुग्राम के लोग भी खरीद रहे है.

Faridabad Carrot Farming

यह खाद एक नेचुरल प्रोसेस से बनती है. इसका इस्तेमाल किचन गार्डन और पार्कों में किया जाता है. RPS सवाना समेत दूसरी सोसाइटियां भी महिलाओं को इस मुहिम से जोड़ रही है.

YouTube से सीखा पूरा प्रोसेस

ग्रेटर फरीदाबाद की समर पाप सोसाइटी की रहने वाली बबीता सिंह पेशे से ककेंट राइटर है और फ्रीलांसर के तौर पर काम करती है. उनकी कई किताबें भी पब्लिश हो चुकी है. बबीता सिंह को कचरे खाद बनाने का आइडिया एक यूट्यूब वीडियो देखकर आया. उन्होंने खाद बनाने का पूरा प्रोसेस यूट्यूब से सीखा है.

उन्होंने 2021 में एक ड्रम से शुरुआत की है. शुरुआत में वह अपनी और अपने पड़ोसियों की रसोई से कचरा एकत्रित कर रही थी. धीरे- धीरे दूसरे लोग भी उनकी इस मुहिम से जुड़ने लगे. उनके पास ऐसे दर्जनों ड्रम है, जिसमें खाद तैयार की जा रही है. पूरी सोसाइटी का कचरा यही डाला जाता है और उसी से खाद तैयार की जाती है.

500 स्क्वायर यार्ड में बनाया गया छोटा जंगल

सोसाइटी ने जापानी टेक्नॉलाजी अपनाई है और 500 स्क्वायर यार्ड में 1200 से ज्यादा नीम, पीपल और जामुन के पेड़ लगाए है. सोसाइटी में रहने वाले प्रभदीप आनंद ने बताया कि मियावाकी टेक्निक छोटी जगह में जंगल उगाने का एक बहुत अच्छा तरीका है. जंगल उगाने का यह तरीका जापानी बॉटनिस्ट अकीरा मियावाकी ने खोजा था. बड़े पौधों के बीच छोटे पौधे लगाए जाते है और बाद में घना जंगल बन जाता है. यह छोटा जंगल RWA प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी और दूसरों की मदद से बनाया गया है.

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Anita Poonia
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मेरा नाम अनीता पूनिया है. मैं पिछले 2 साल से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हूँ. वर्तमान मे Haryana E Khabar न्यूज वेबसाइट के लिए कंटेंट राइटर का काम कर रही हूँ.