झज्जर | हरियाणा में परिवार पहचान पत्र से छेड़छाड़ मामले में नया खुलासा हुआ है. अदालत के आदेश पर परिवार पहचान पत्र (PPP) छेड़छाड़ केस की दोबारा की गई जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में पुलिस ने जांच रिपोर्ट पेश की है. इसमें कहा है कि 8 हजार फैमिली आईडी की जांच में 5 हजार ऐसे मिले हैं, जिनमें सादे कागज लगाकर परिवारों की इनकम घटाई गई है, जबकि महज 50 परिवारों के ही कागजात ठीक पाए गए हैं.
ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा
अदालत में पुलिस की तरफ से दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि PPP अथॉरिटी के मुताबिक, परिवारों की इनकम बदलने के लिए सादे कागज की पीडीएफ बनाकर आईडी में बार-बार अपलोड किया गया है. कहा गया है कि पीडीएफ बनाते समय एक कोड जरनेट होता हैं, लेकिन अधिकतर परिवार पहचान पत्र में एक ही कोड का इस्तेमाल बार- बार किया गया है.
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने दूसरे जिलों के 5 हजार परिवार पहचान पत्रों में बदलाव किए हैं, जबकि उनके पास दूसरे जिलों के परिवार पहचान पत्र में बदलाव की शक्तियां ही नहीं थी. परिवार पहचान पत्र अथॉरिटी की जांच में सामने आया है कि जिन लोगों की गलत तरीके से इनकम कम की गई है, उनमें अब तक करीब 1600 परिवारों के बीपीएल कार्ड बन चुके हैं. यह जानकारी भी पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कोर्ट में पेश की है.
80 करोड़ से ज्यादा का नुक़सान
रिपोर्ट में कहा गया है कि बीपीएल कार्ड बनने के बाद पात्र सरकारी राशन, चिरायु योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं. अकेले चिरायु योजना का लाभ लेने पर एक साल में परिवार के एक सदस्य को 5 लाख रुपये के इलाज तक की सुविधा मिलती है. ऐसे में अगर एक सदस्य ने भी इसका फायदा अब तक लिया होगा, तो सरकार को करीब 80 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है.
पुलिस ने दर्ज किया केस
साइबर पुलिस ने परिवार पहचान पत्र केस में अब आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दी हैं. वीरवार को पुलिस ने कोर्ट में बताया कि आरोपियों के खिलाफ सेक्शन- 7. सेक्शन 13 (1) ए, सेक्शन 13 (1) बी धाराएं नई जोड़ी हैं. कोर्ट ने इस मामले में पुलिस से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के बारे में सवाल किया था. तब पुलिस ने कहा था कि यह धाराएं भी बनती हैं. कोर्ट ने पुलिस को धाराएं जोड़ने के आदेश दिए थे.
