धार्मिक डेस्क, Vastu Tips | वास्तु शास्त्र में ईशान कोण का विशेष महत्व बताया गया है. यह स्थान केवल पूजा का स्थान ही नहीं बल्कि बुद्धि- विवेक -मानसिक स्वास्थ्य का भी केंद्र बिंदु माना जाता है. आज की इस खबर में हम आपको वास्तु शास्त्र में ईशान कौन से जुड़े हुए नियमों के बारे में जानकारी देने वाले हैं. इसका सीधा प्रभाव व्यक्ति की सोच, फैसला लेने की क्षमता और स्वास्थ्य पर भी दिखाई देता है.
कई बार ईशान कोण सही तरह से ऑर्गेनाइज्ड न होने की वजह से व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है.
वास्तु शास्त्र में ईशान कौण से जुड़े कुछ जरूरी नियम
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, ईशान कोण में मंदिर हो या ना हो लेकिन यह स्थान हल्का साफ सुथरा और खुला होना बेहद जरूरी माना जाता है. यह दिशा जितनी साफ और व्यवस्थित होगी उतनी ही व्यक्ति की बुद्धि तेज होगी और फैसला लेने की क्षमता भी तेज होगी.
- ईशान कोण में सबसे बड़ा दोष रसोई या टॉयलेट में हद से ज्यादा लाल रंग का इस्तेमाल करना माना जाता है. लाल रंग की अधिकता की वजह से व्यक्ति में क्रोध और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है. यदि इस दिशा में स्टोर रूम हो तो व्यक्ति को हमेशा ही अपने मन में भार महसूस होता है. परिवार के रिश्तों में भी काफी ज्यादा तनाव बढ़ जाता है. ऐसे में आपको ईशान दिशा में हल्का नीला- सफेद- क्रीम रंग करना चाहिए, इसे काफी अच्छा माना जाता है.
- यह दिशा घर के मंदिर के लिए काफी अच्छी मानी जाती है.भूल कर भी आपको दक्षिण पश्चिम दिशा में घर का मंदिर स्थापित नहीं करना चाहिए. वही पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर ही होना चाहिए. भगवान की मूर्तियों को भी पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके ही रखना चाहिए.
- आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि मंदिर ज्यादा सजावटी ना हो, सरल और साफ तरीके से व्यवस्थित होना चाहिए. मंदिर में किसी प्रकार की टूटी- फूटी मूर्तियों या फटी तस्वीरों को आपको नहीं रखना चाहिए. मंदिर में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए और आपको पूजा से जुड़े हुए नियमों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
