करनाल | हाल ही में अमेरिका ने 104 भारतीय प्रवासियों को डिपोर्ट कर दिया है, जिनमें से कई पर भारी कर्ज चढ़ा हुआ है और उनके परिवार अब आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच करनाल के अंकित की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. साल 2020 में अमेरिका से डिपोर्ट हुए अंकित ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर नई शुरुआत की. अंकित ने 32 लाख रुपये खर्च कर डोंकी रूट के जरिए अमेरिका जाने की कोशिश की, लेकिन वहां की सरकार ने उन्हें वापस भेज दिया. भारत लौटने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को फिर से संवारा और न केवल खुद का व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि चार साल में सारा कर्ज भी चुका दिया.
जंगलों, समुद्र और जेल तक का किया सफर
अंकित साल 2019 में डोंकी रूट के जरिए अमेरिका के लिए निकले थे. इस दौरान उन्होंने इथोपिया, पनामा, इक्वाडोर, ब्राजील और पेरू सहित कई देशों का सफर किया. अमेरिका पहुंचने के बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया, जहां हालात बेहद खराब थे. उन्होंने बताया कि उन्हें दिवाली तक जेल में मनानी पड़ी. वहां टॉर्चर किया जाता था और समय पर खाना तक नहीं मिलता था. जंगलों और समुद्र के खतरनाक रास्तों से गुजरते हुए वह आखिरकार अमेरिका पहुंचे, लेकिन वहां की सरकार ने साल 2020 में उन्हें भारत डिपोर्ट कर दिया.
अब खुद का बिजनेस कर रहे अंकित
अमेरिका से लौटने के बाद अंकित ने अपनी मेहनत से एक कैफे शुरू किया. अब वह न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं, बल्कि अपनी मेहनत से चार साल में पूरा कर्ज भी चुका दिया है. अंकित का कहना है कि अब वह कभी विदेश नहीं जाना चाहते और बाकी लोगों को भी डोंकी रूट से जाने की गलती न करने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि भारत में रहकर भी अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है.
