महेंद्रगढ़ | हरियाणा में बाजरा उत्पादक किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है. बाजरा की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है. किसानों का कहना है कि उनकी फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद नहीं हो रही है. भांवातर भरपाई योजना का लाभ मिलने के बावजूद भी वे घाटे में ही रहेंगे. नारनौल क्षेत्र की बात करें, तो इस बार ज्यादा बारिश से बाजरे का रंग काला पड़ चुका है.
नमी भी ज्यादा रही है, जिसके चलते सरकारी खरीद एजेंसियों ने खरीद बंद कर दी और अब मंडियों में प्राइवेट एजेंसियां खरीद कर रही है. प्राइवेट एजेंसी मनमाने दाम पर खरीद कर रही है, जिसके चलते किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.
क्या है बाजरे की MSP?
सरकार ने बाजरे का MSP 2,775 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया था. इसमें 2200 रुपए MSP और 575 रुपए भांवातर भरपाई योजना के शामिल हैं. वहीं, किसानों का कहना है कि उनके बाजरे को 1600-1800 रुपए प्रति क्विंटल तक खरीदा जा रहा है. इसलिए भाव का अंतर 800 से 1 हजार रुपए तक है. यदि प्राइवेट एजेंसी 2200 रुपए खरीद करें, तब जाकर किसानों को राहत मिल सकती है. इससे नीचे बिक्री पर किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.
किसानों के ले रहे मजे
गांव कोरियावास के एक किसान ने बताया कि प्राइवेट खरीददार किसानों के मजे ले रहे हैं. वे उछाल- उछाल कर बाजरे का भाव लगा रहे हैं. कोई 1600 तो कोई 1700 रुपए प्रति क्विंटल तक भाव लगा रहा है. प्राइवेट एजेंसी वाले बाजरे की खरीद पर अपनी मनमानी चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि बोली 2 हजार रुपए से शुरू होनी चाहिए और 5 रुपए का अंतर होना चाहिए, मगर 1- 1 रुपया बढ़ाकर किसानों को परेशान कर रहे हैं.
नारनौल मार्केट सचिव ने बताया कि इस बार बाजरे की खरीद प्राइवेट एजेंसियों द्वारा की जा रही है. ये बाजरे की क्वालिटी के हिसाब से भाव लगा रहे हैं. उन्होंने बताया कि ज्यादा बारिश से इस बार बाजरे की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. काले बाजरे को मुर्गी तक नहीं खाती है. सफेद बाजरा मंडी में 2400 रुपए और काला बाजरा 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका हैं.
