महेंद्रगढ़ | दक्षिण हरियाणा में रेलयात्रियों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है. बता दें कि रेवाड़ी- नारनौल रेलखंड के दोहरीकरण कार्य को बड़ी उपलब्धि मिली है. अटेली से नारनौल के बीच 14 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन के दोहरीकरण कार्य को पूरा कर लिया गया है और कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी (CRS) द्वारा आज इसका ट्रायल किया जाएगा. यदि निरीक्षण सफल रहा तो इस रेलवे लाइन पर नियमित ट्रेनों के संचालन की तस्वीर साफ हो जाएगी.
रेवाड़ी से नारनौल तक 52 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन प्रोजेक्ट पर कुल 666.72 करोड़ रुपए की लागत राशि खर्च होगी. इस प्रोजेक्ट को दो चरणों रेवाड़ी से काठुवास तथा काठुवास से नारनौल के हिसाब से पूरा किया जाएगा.
यात्रियों को मिलेगा फायदा
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि अटेली से कुंड तक करीब साढ़े 10 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का दोहरीकरण कार्य पूरा हो चुका है. वहीं, काठुवास (कुंड) से रेवाड़ी हिस्से पर 50% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. इस प्रोजेक्ट के चरणबद्ध क्रियान्वयन से क्षेत्र में रेल अवसंरचना को और ज्यादा मजबूती मिलेगी.
उन्होंने बताया कि काठुवास से रेवाड़ी तक के बचे हुए दोहरीकरण कार्य को खाटूश्याम धाम पर आयोजित वार्षिक फाल्गुनी मेले के बाद रफ्तार मिलेगी. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर क्रॉसिंग के लिए ट्रेनों के लंबे ठहराव की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों और मालवाहक ट्रेनों की औसत रफ्तार में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी.
आर्थिक- धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
इस प्रोजेक्ट का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके बाद लगभग 164 किलोमीटर लंबे नारनौल- रींगस- फुलेरा के दोहरीकरण का प्रस्ताव है. यह पूरा कॉरिडोर तैयार होने पर दिल्ली से रींगस, जयपुर और आगे अहमदाबाद तक एक और वैकल्पिक व तेज रूट की सुविधा मिलेगी. वर्तमान दिल्ली- रेवाड़ी- जयपुर मुख्य रेलवे लाइन की तुलना में यह रूट लगभग 70 किलोमीटर छोटा होगा जिससे जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई के सफर के समय में घंटों की बचत आएगी.
दक्षिण हरियाणा के लिए आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों की दृष्टि से भी यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शैक्षणिक दृष्टि से भी यह प्रोजेक्ट वरदान साबित होगा. खाटूश्याम और सालासर बालाजी के लिए तेज और सीधी कनेक्टिविटी प्रदान होगी. शेखावाटी क्षेत्र के शिक्षा संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने वाले स्टूडेंट्स तथा सेना में कार्यरत जवानों के लिए भी ट्रेनों की संख्या और तेज गति की सुविधा बढ़ेगी.
