नई दिल्ली | सरकारी कर्मचारियों के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है. बता दें कि पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नियमों में कुछ बदलाव किए है. यदि कोई कर्मचारी पेंशन नियमावली 2021 के तहत विकल्प का चुनाव नहीं करता तो उसे पेंशन नहीं मिलेगी. पहले इसके लिए कोई विकल्प नहीं होता था, लेकिन अब इससे संबंधित सूचना जारी कर दी है.
विकल्प नहीं चुना तो पेंशन शून्य
PFRDA द्वारा जारी सूचना के अनुसार, अगर किसी सरकारी कर्मचारी की नौकरी 15 से कम है या 15 से 20 के बीच है तो उसने यदि पेंशन नियमावली 2021के तहत विकल्प का चुनाव नहीं किया तो कार्यकाल के दौरान कर्मचारी की मौत हो जाए या वह पूर्ण विकलांग हो जाए तो ऐसी स्थिति में पेंशन शून्य हो जाएगी. ऐसी स्थिति में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत 20 साल से ऊपर नौकरी करने पर ही मौत व पूर्ण विकलांग के केस में पेंशन का लाभ मिल सकेगा.
राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) में साफ प्रावधान था कि यदि रिटायरमेंट से पहले कर्मचारी की मौत हो जाएं या विकलांग हो जाए तो उसके परिवार वालों को हक था कि वह 2 विकल्पों में से एक का चयन करें. पहला अंशदान को ब्याज के साथ और पेंशन के रूप में 50% महंगाई भत्ते के साथ ले लें. दूसरा NPS फंड में जमा कुल राशि में से 20% ले लें और 80% राशि से एन्युटी खरीद कर पेंशन ले लें.
नॉमिनी को मिलेगी पेंशन फंड की राशि
अब PFRDA ने नियमों में बदलाव करते हुए 15 वर्ष से कम के कार्यकाल में कर्मियों की मृत्यु और विकलांगता के दौरान विकल्प का चुनाव न होने पर पेंशन शून्य करते हुए पेंशन फंड की राशि नॉमिनी का देने का प्रावधान किया गया है. भारतीय NPS कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल का कहना है कि जब ये नियम लागू किए गए थे तब विकल्प चुनना जरूरी नहीं था.
