नूंह | हरियाणा के सबसे पिछड़े क्षेत्र के रूप में शुमार मेवात के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. वैसे कहने को तो मेवात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से मात्र 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन वंदे भारत और मेट्रो के जमाने में यहां के लोगों के लिए सामान्य रेल एक सपना बना हुआ है. बहुत जल्द इन लोगों को यह सपना पूरा होने जा रहा है.
दशकों पुरानी मांग हुई पूरी
प्रदेश में बहुत सी सरकारें आई और चली गई. सभी राजनीतिक दलों ने इस इलाके में ट्रेन संचालित करने के बड़े- बड़े दावे किए, लेकिन पूरे किसी सरकार ने नहीं किए. अब सूबे की नायब सैनी सरकार मेवात के लोगों का रेल की सीटी बजने के सपने को साकार करने वाली है.
साल 2005 में गुरुग्राम से अलग होकर मेवात हरियाणा का 20वां जिला बना था. इस जिले के हजारों लोग अपने शहर में ट्रेन दौड़ती देखें बिना ही दुनिया से अलविदा हो चुके हैं और कुछ उम्र के आखिरी पड़ाव पर है. मेवात की आधी से ज्यादा आबादी ने ट्रेन में सफर करना, तो दूर कभी रेल को देखा तक नहीं है.
सभी राजनीतिक दलों ने मेवात को रेलवे लाइन से जोड़ने का आश्वासन देकर जमकर वोट हासिल किए, लेकिन यहां के लोगों को ट्रेन का सफर नसीब नहीं हुआ. मेवात के कई सामाजिक संगठनों ने भी ट्रेन के संचालन के लिए कई मर्तबा आंदोलन किए, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई. हालांकि, अब यह खबर राहत लेकर आई है.
विकास के पथ पर अग्रसर होगा मेवात
मेवात जिले में रेल कनेक्टिविटी से विकास के रास्ते खुलेंगे. ट्रेन की सुविधा मिलने पर यहां के लोग दूध, सब्जी आदि का व्यापार करते हुए NCR के बड़े शहरों तक अपनी पहुंच बनाकर बेरोजगारी के कलंक को मिटाने का काम करेंगे. शिक्षा के लिए युवा एनसीआर के शहरों तक आवागमन कर सकेंगे. लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
रेल मंत्रालय ने दी मंजूरी
मेवात वासियों की दशकों पुरानी मांग को केंद्र की BJP सरकार ने अब हरी झड़ी दिखाई है. केंद्रीय बजट में रेल मंत्रालय ने दिल्ली- सोहना- नूंह- फिरोजपुर झिरका और अलवर रेलवे लाइन को मंजूरी दे दी है. 104 किलोमीटर लंबी इस लाइन के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया है. मंजूरी के बाद रेलवे ने लाइन के लिए बजट हेड खोल दिया हैं. जल्द ही, इस लाइन के लिए रेलवे की ओर से सर्वे शुरू किया जाएगा. सरकार की इस घोषणा से क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है.
