एक्सग्रेसिया पॉलिसी में मृतक कर्मियों के आश्रितों के साथ किया अन्याय, नही मिला कोई भी आश्वासन

जींद | एक्सग्रेसिया पॉलिसी के अनुसार मृतक कर्मियों के आश्रितों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी देने का नियम प्रावधान है. इसे 2006 के बाद से सरकार द्वारा बंद कर दी कर गयीं थी जिसके अनुसार मृतक कर्मियों के आश्रितों को नौकरी देने का प्रावधान बंद कर दिया गया था. लेकिन, हाल ही में 2019 मैं इस प्रावधान मैं कुछ बदलाव किए गए है. आपको बता दे कि अब इसके अनुसार दोबारा से मृतक कर्मियों के आश्रितों को नौकरी का प्रावधान शुरू कर दिया गया है. लेकिन, इस नए क़ानून में 2006-2019 के बीच के लोगों को शामिल नहीं किया गया. इसी को लेकर कई युवा लगातार इधर- उधर इन्साफ के लिए भटक रहे है.

Ex gratia policy

जींद निवासी मृतक कर्मी के बेटे सत्यम ने हरियाणा ई खबर को बताया कि हम इस बारे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को ज्ञापन देकर आये थे लेकिन हमें कोई आश्वासन नही मिला. जानकारी के मुताबिक, मृतक कर्मियों के परिवार से कई योवा लगातार इस बारे में विरोध कर थे लेकिन उनकी इस समस्या के बारे में अभी तक कोई समाधान नही मिला. सत्यम ने बताया कि सरकार हमारे साथ अन्याय कर रही है. जिसके खिलाफ हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे.

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सत्यम ने बताया कि सभी मृतक कर्मियों ने इतने वर्ष तक निहसवार्थ मन से सरकार की सेवा की लेकिन सरकार उनके आश्रितों को नौकरी का हक क्यों नही दे रही. क्या, उनके आश्रितों के प्रति सरकार का कोई दायित्व नहीं बनता? सरकार के लिए जनता तो सब बराबर होनी चाहिए तो 2006-2019 के बीच वालो के साथ नाइन्साफ़ी क्यों कि जा रही है. सरकार का यह दायित्व होना चाहिए की नियम सब के लिए बराबर हो तथा आश्रितों को उनकी योग्यता के अनुसार किसी भी विभाग मैं नौकरी प्रदान की जाए इस से बेरोज़गारी भी कम होगी तथा कई परिवारों को रोज़गार भी मिलेगा.

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