फरीदाबाद | आधुनिकता के इस दौर में इंसान ने गर्मी से पीछा छुड़ाने के लिए भले ही फ्रिज में ठंडा पानी का इंतजाम कर लिया हो, लेकिन कई लोग आज भी घड़े में रखें पानी को महत्व देते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि घड़े में रखा पानी ताजगी से परिपूर्ण होता है. डॉक्टर भी इसे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानते हैं.
आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो मिट्टी के घड़े या थरमस में रखें पानी को पीना पसंद करते हैं. बाजार में मिट्टी से बने थरमस की एकदम से डिमांड बढ़ी है. यह दिखने में तो आकर्षक होते ही हैं, साथ ही इसका पानी आपको ताजगी से सराबोर कर देता है.
तंगहाली में गुजर रहा कलाकारों का जीवन
इतने सब गुण होने के बावजूद भी इन्हें बनाने वाले परिवार आज भी तंगहाली का जीवन बिताने को मजबूर हैं. उनके लिए दो समय की रोजी- रोटी का जुगाड़ कर पाना भी काफी मुश्किल साबित हो रहा है. महंगाई के इस दौर में जहां सभी रोजमर्रा के सामानों की कीमतें आसमान छू रही हैं. ऐसे में मिट्टी से बने इन बर्तनों को बनाने वाले लोगों को महंगाई में घर का गुजारा तक चला पाना मुश्किल भरा साबित हो रहा है.
हरियाणा के फरीदाबाद के बाजारों में आकर्षक डिजाइन के थरमस खूब ज्यादा बिक रहे हैं. देखने में यह स्टील वाले थरमस के जैसे लगते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से प्राकृतिक मिट्टी से बने होते हैं. इसमें रखा हुआ पानी काफी समय तक ठंडा रहता है और इसका स्वाद भी घड़े के पानी जैसा होता है.
बढ़ती मांग के बावजूद बेघर होने का खतरा
यही कारण है कि इनकी डिमांड जबरदस्त तरीके से बढ़ी है. पिछले 35 सालों से मिट्टी के बर्तनों का व्यवसाय कर रहे हैं जगदीश बताते हैं कि उनके पास पांच से लेकर 50 लीटर तक के घड़े उपलब्ध हैं. इनकी कीमत 60 से ₹600 के बीच में है. यदि कोई टूटी लगवाना चाहे, तो उसके 30 से ₹40 अतिरिक्त लगते हैं. वह बताते हैं कि इस काम से उन्हें महीने में 10 से ₹15000 तक की आमदनी होती है, जिससे मुश्किल से ही कुछ घर का गुजारा हो पाता है.
सता रहा बेघर होने का डर
वह बताते हैं कि उनका परिवार एक इलाके में झुग्गी में रहता है, लेकिन नगर निगम द्वारा इन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की जा चुकी है. अब उनके सामने बेघर होने की समस्या भी आन पड़ी है. एक तरफ महंगाई और दूसरा बेघर होने का खौफ. आलम यह हो चुका है कि जो लोग अपनी कला से पुरानी संस्कृति को संजोए हुए हैं और लोगों की प्यास बुझाने का काम कर रहे हैं, आज उनके घर भी सुरक्षित नहीं हैं.
