नई दिल्ली | केंद्र की मोदी सरकार (Modi Govt) मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दे रही है. मोटे अनाज की खेती में रागी प्रमुख फसल है क्योंकि इसके अनगिनत फायदों के चलते लोग इसका सेवन करना पसंद करते हैं. खरीफ सीजन में किसान धान की जगह पर रागी की खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी खेती पर खाद- बीज से लेकर कीटनाशक पर नाममात्र खर्च आता है. वहीं, रागी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) धान की तुलना में दोगुना से ज्यादा है.
सुपर फूड है रागी
रागी की रोटी में कैल्शियम और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है. इसमें एक अमीनो अम्ल मेथिनोनीन भी होता है जो एक प्रोटीन घटक है. लगभग 100 ग्राम खपत पर यह 340 ग्राम कैलोरी ऊर्जा प्रदान करता है. सर्दियों के मौसम में रागी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद रहता है.
देश के अलग- अलग हिस्सों में रागी फसल की कई लोकप्रिय किस्मों की खेती की जाती है. वीएल 101, वीएल 204, वीएल 124, वीएल 149, वीएल 146, वीएल 315 (105-115 दिनों में परिपक्वता) और वीएल 324 (105- 135 दिनों में परिपक्वता).
खेती का तरीका
रागी फसल की खेती सिंचित और असिंचित दोनों जगहों पर की जा सकती है. यह गंभीर सूखे को सहन कर सकती है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी आसानी से रागी फसल को उगाया जा सकता है. रागी के लिए 4.5- 8 PH वाली मिट्टी भरपूर पैदावार के लिए सर्वोत्तम मानी गई है. पूरे साल इसे आसानी से उगाया जा सकता है. यह सभी छोटे मिलेट के बीच अत्यधिक उगाई जाने वाली फसल है.
धान की खेती में जहां ज्यादा पानी, खाद व कीटनाशक की जरूरत होती है, तो वहीं रागी की फसल में कम पानी, खाद व कीटनाशक की जरूरत पड़ती है. यदि समय पर बिजाई कर ली जाए तो प्रति हेक्टेयर 25 क्विंटल तक पैदावार ली जा सकती है.
दोगुनी कमाई का मौका
हाल ही में केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2025- 26 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की है. पिछले साल की तुलना में जहां धान की MSP में 69 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, तो वहीं रागी फसल की MSP में 596 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी के बाद धान का सरकारी भाव 2,369 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि रागी का भाव 4,886 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है. यानि धान से दोगुना रेट पर बेचकर किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.
