फतेहाबाद के राजेश वर्मा की सफलता की कहानी, डेढ़ साल की उम्र में हुआ पोलियो; दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ चयन

फरीदाबाद | दिव्यंगता का दंश झेल रहे हरियाणा के फरीदाबाद के क्रिकेटर राजेश वर्मा का चयन भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ है. जल्दी ही इंटरनेशनल लेवल पर वह अपना प्रदर्शन करते नजर आएंगे. अगले महीने के अंतिम सप्ताह या जुलाई में इंडियन टीम और श्रीलंका के बीच प्रतियोगिता का आयोजन किया जा सकता है, जहां से वह इंटरनेशनल टूर्नामेंट में एंट्री कर लेंगे. आज वह ग्वालियर में टी- 10 टूर्नामेंट का हिस्सा बने हुए हैं, जिसमें चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा की टीमें हिस्सा ले रही हैं.

Rajesh Fatehabad

नहीं मानी हार

फतेहाबाद के भट्टू ब्लॉक स्थित गांव दैयड़ निवासी राजेश के इस जज्बे ने ही उन्हें व्हीलचेयर क्रिकेट का सितारा बना दिया. उनके पिता का निधन नेशनल टूर्नामेंट खेलने के दौरान ही हो गया था, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. टूर्नामेंट के बीच में आकर उन्होंने सभी रस्मों को निभाया और वापस जाकर टूर्नामेंट को ज्वाइन किया. राजेश की बेहतर प्रदर्शन की बदौलत ही इस टूर्नामेंट में कर्नाटक की टीम को हराकर चंडीगढ़ की टीम ने विजेता का खिताब पाया. अब तक वह 43 मैचेस खेल चुके हैं जिनमें उन्होंने 78 विकेट झटके हैं. 13 रन देकर 5 विकेट उनका हाई स्कोर रहा है.

शानदार प्रदर्शन के आधार पर हुआ चयन

ग्वालियर में फरवरी के महीने में हुए नेशनल टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर राजेश का चयन हुआ है. इसमें 18 स्टेट टीमों ने हिस्सा लिया था. इस टूर्नामेंट में राजेश टॉप 3 गेंदबाजों में शामिल रहे थे. राजेश ने क्रिकेट की बारीकियां अपने कोच जगरूप कुंडू के मार्गदर्शन में सीखी हैं. वह बताते हैं कि अब वह चंडीगढ़ की टीम में खेलते हैं. बीते 5 सालों के दौरान उन्होंने कई मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. इनमें से भी कई मैचों में उन्होंने निर्णायक की भूमिका निभाई है.

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दिव्यांगता से नहीं मानी हार

राजेश के पिता का इसी साल फरवरी में निधन हो गया था. अब उनके परिवार में उनकी मां कमला देवी और भाई जगदीश हैं, जोकि टैक्सी चलाते हैं. राजेश ने बताया कि महज डेढ़ साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था. तब से वह व्हीलचेयर के सहारे से ही चल पाते हैं. बचपन में उन्हें दिव्यंगता के चलते काफी ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. वह बाकी बच्चों की तरह ना खेल पाए थे और ना ही बाकी दिनचर्या के काम कर पाते थे, लेकिन परिवार का हमेशा उन्हें सहयोग मिलता रहा. उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाई हासिल की.

बने चंडीगढ़ टीम के स्टार

अपने शुरुआती क्रिकेट के दिनों को याद करते हुए वह कहते हैं कि साल 2020 में वह गाड़ी मॉडिफाई करवाने के लिए गए थे जहां उनकी मुलाकात सुखवंत से हुई. उन्होंने उन्हें व्हीलचेयर क्रिकेट के बारे में जानकारी दी. तब से उन्होंने खेलने की शुरुआत कर दी थी. गांव में ही उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की. उसके बाद जिला, फिर स्टेट और नेशनल लेवल पर खेलना शुरू कर दिया. क्रिकेट के प्रति अपनी दीवानगी के चलते आज 27 वर्षीय राजेश वर्मा चंडीगढ़ और हरियाणा के दिव्यांग क्रिकेटरों में स्टार क्रिकेटर के तौर पर जाने जाते हैं.

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Nisha Tanwar
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